धनबाद का कोयला माफिया जी.यादव: पारबाद से लेकर लोदना तक फैला अवैध खनन का साम्राज्य

धनबाद का कोयला माफिया जी.यादव: पारबाद से लेकर लोदना तक फैला अवैध खनन का साम्राज्य

झरिया: झरिया का इलाका कोयले की काली कमाई के लिए हमेशा चर्चाओं में रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक संरक्षण के चलते यह अवैध कारोबार अब और भी निर्भीक हो चुका है। कोयलांचल में बेखौफ कोयले का कारोबार चल रहा है। गुरुवार की देर रात ग्रामीणों ने सिंदरी बस्ती के समीप कोयला से लदा ट्रक को रोक दिया। ग्रामीणों ने पूछा यह कोयला किसका है और कहा से ले जा रहे है। चालक ने बताया कि यादव के भट्टे से लोड कर ले जा जा रहे हैं। बता दे कि अलकडीहा ओपी के पारबाद शिव मंदिर के पास स्थित अवैध कोयला डिपो इस तस्करी के केंद्र में है, जहां चोरी का कोयला लाकर ट्रकों में लोड किया जाता है और फिर फर्जी जीएसटी इनवॉइस और ई-वे बिल (डिस्को पेपर) के माध्यम से बिहार, बंगाल और अन्य राज्यों में भेज दिया जाता है। इस अवैध कारोबार के लिए कोयला मुख्य रूप से जीनागोड़ा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट, सुषी ओपन कास्ट प्रोजेक्ट और कुजामा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट तथा बागडीगी जोड़िया, सुरुंगा शिव मंदिर, भूलन बरारी 6 नंबर, पहाड़ीगोड़ा, जयरामपुर एरिया ऑटो गैरेज के अवैध खदानों से खनन एवं 6 व 9 नंबर साइडिंग, लोदना 8 व 12 नंबर, लक्ष्मी कॉलोनी रेलवे फाटक, पुराना रक्षाकाली धाम, बागडीगी 8 नंबर, जयरामपुर 8 नंबर, ब्राहमण बरारी से चोरी किया जाता है। पारबाद शिव मंदिर के पास स्थित अवैध कोयला डिपो में जमा किए गए इस चोरी के कोयले को सफेद बनाने के लिए बंगाल के किसी डिपो के वैध कागजात तैयार किए जाते हैं और फिर ट्रकों को आगे की यात्रा के लिए रवाना किया जाता है। इस पूरे खेल में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं फर्जी जीएसटी इनवॉइस और ई-वे बिल, जिन्हें स्थानीय भाषा में “डिस्को पेपर” कहा जाता है। हर ट्रक के लिए इन दस्तावेजों की कीमत ₹35,000 से ₹50,000 तक होती है। इस तरह यह पूरा रैकेट न केवल कोयला चोरी का संगठित अपराध है, बल्कि जीएसटी चोरी का एक बड़ा उदाहरण भी है।

झरिया से जोशी न्यूज़ रिपोर्टर मुजाहिद

छाया कर दिलीप गुप्ता की खासरिपोर्ट

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