कालराषि के नाम से जानी जाती है। दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है।

कालराषि के नाम से जानी जाती है। दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है।

इस दिन साधक का मन ‘सहबार चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। देवी कालरात्रि को व्यापक रूम से माता देवी-काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृत्यू-रुद्राणी, चामुंब, चंदी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। रौद्री, कुम्वर्णा कालरात्रि मां के अन्य कम प्रसिद्ध नामों में हैं। नवरात्रि की सप्तमी के दिन माँ कालरात्रि की आराधना का विधान है। इनकी पूजा-अर्चना करने सभी पापों से मुक्ति मिलती है व दुश्मनों का नाश होता है, तेब सेबढ़ता है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्य कर नवरात्रि में सातवें दिन इसका जाप करना चाहिए।

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