​प्रदूषण बोर्ड की चुप्पी या मिलीभगत? डोमगढ़ का मोबिल प्लांट छीन रहा लोगों की जिंदगी और चैन!

सिंदरी के डोमगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में मोबिल रिफाइनिंग का काला खेल: ज़हरीली हवा से फेफड़े छलनी, बेहोश होने की कगार पर राहगीर!

सिंदरी के डोमगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में पुराने मोबिल को रिफ्रेश और रिसाइकिल करने वाले प्लांट से फैल रहे बेकाबू प्रदूषण ने स्थानीय निवासियों और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। पुराने मोबिल को रिफाइन करने की इस प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले खतरनाक रसायनों की तीखी और सड़ान्द भरी दुर्गंध पूरे इलाके में इस कदर फैल चुकी है कि लोगों का सड़क से गुजरना दूभर हो गया है। जहरीली हवा और घुटन के कारण आने-जाने वाले राहगीरों तथा आसपास के स्थानीय लोगों को सांस लेने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों और इस मार्ग से रोजाना आने-जाने वाले राहगीरों का कहना है कि मोबिल रिफ्रेशिंग यूनिट से उठने वाली बदबू इतनी तेज और जहरीली होती है कि थोड़ी देर वहां रुकने से ही सिरदर्द, चक्कर आने और उल्टी जैसी शिकायत होने लगती है। राहगीरों को मुंह और नाक पर कपड़ा बांधकर इस रास्ते से निकलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद यह जहरीली हवा उनके फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर नुकसान पहुंचा रही है।

इस गंभीर मामले को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Jharkhand State Pollution Control Board) में विधिवत शिकायत दर्ज कराए हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि लंबी अवधि गुजर जाने के बावजूद प्रदूषण बोर्ड की तरफ से आज तक कोई ठोस कार्रवाई या जवाब नहीं आया है। प्रशासनिक और विभागीय उदासीनता के कारण प्लांट संचालक बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार पुराने मोबिल को रिफाइन करने की प्रक्रिया में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स और कई तरह के खतरनाक हाइड्रोकार्बन हवा में घुलते हैं। चिकित्सकीय जांच के मुताबिक इस तरह के प्रदूषित वातावरण में रहने से मानव शरीर के श्वसन तंत्र पर बहुत बुरा असर पड़ता है। जहरीली दुर्गंध और रसायन सीधे श्वासनली और फेफड़ों को प्रभावित करते हैं जिससे क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा का अटैक और सांस की नली में सूजन जैसी गंभीर बीमारियां जन्म लेती हैं। इसके अलावा प्रदूषित हवा और टॉक्सिक धुएं के लगातार संपर्क में रहने से फेफड़ों की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता तेजी से घटती है जिससे पीड़ित को हमेशा थकान और दम घुटने का अहसास होता है। मोबिल रिफाइनिंग के दौरान उड़ने वाले वाष्पशील रसायन तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करते हैं जिससे लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, मानसिक सुस्ती और जी मिचलाने की समस्या होती है। हवा में मौजूद तेजाबी और रासायनिक कणों के कारण आंखों में तेज जलन, लाली और त्वचा पर गंभीर चकत्ते व एलर्जी उभरने लगते हैं। लंबे समय तक ऐसी दूषित और बदबूदार हवा में सांस लेने से रक्त धमनियों में संकुचन होता है जिससे ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा भी खतरनाक रूप से बढ़ जाता है।

एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रदूषण बोर्ड की चुप्पी और प्लांट की मनमानी से आक्रोशित क्षेत्र के लोगों और राहगीरों ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही डोमगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया स्थित इस मोबिल रिफाइनिंग प्लांट की उच्चस्तरीय जांच कर इसे बंद नहीं किया गया, तो विवश होकर स्थानीय जनता और पीड़ित लोग सड़कों पर उतरकर एक बड़ा और उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और प्लांट प्रबंधन की होगी।

संवाददाता – जोशी न्यूज़ 24

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