CPGRAMS के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा झरिया अंचल, PMO में शिकायत के 109 दिन बाद भी जांच गुम और मुख्य सचिव तक पहुंचा मामला

CPGRAMS के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा झरिया अंचल, PMO में शिकायत के 109 दिन बाद भी जांच गुम और मुख्य सचिव तक पहुंचा मामला

​प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO का लोक शिकायत पोर्टल CPGRAMS, जहां देश की आम जनता अपनी समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान की उम्मीद बांधती है, वहां झरिया अंचल कार्यालय के अधिकारियों की मनमर्जी और प्रशासनिक सुस्ती ने पूरी व्यवस्था की साख पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। अंचल कार्यालय का आलम यह है कि सर्वोच्च स्तर से आई शिकायतों और बार-बार भेजे गए स्मरण पत्रों को सीधे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
​अंचल कार्यालय में नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। केंद्र सरकार का स्पष्ट और कड़ा नियम है कि CPGRAMS पर दर्ज लोक शिकायतों का निवारण 21 से 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से हो जाना चाहिए। इसके बावजूद दर्ज शिकायत को 109 दिन यानी साढ़े तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन न तो कोई जांच रिपोर्ट तैयार की गई और न ही आवेदक को कोई जवाब मिला। आखिर अंचल निरीक्षक राम रतन पांडे 30 दिन की तय सीमा वाले नियम का लगातार उल्लंघन क्यों कर रहे हैं
​इस पूरे घटनाक्रम में कहीं न कहीं झरिया अंचल अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आती है। वे आरोपी अंचल निरीक्षक राम रतन पांडे पर कार्रवाई करने में आखिर क्यों कतरा रहे हैं क्या इस लापरवाही में कहीं न कहीं उनकी मौन सहमति या अंदरूनी सहभागिता है मामला केवल अंचल तक ही सीमित नहीं दिखता, अब यह धनबाद उपायुक्त कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। सवाल उठता है कि क्या यह धनबाद के डीसी साहब का काम हो सकता है आखिर 40 दिन से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी उपायुक्त राम रतन पांडे पर कार्रवाई करने से पीछे क्यों हट रहे हैं
​क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं और यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या अवैध कमाई और अवैध चढ़ावे की आंच अब सीधे मुख्य सचिवालय तक पहुंच रही है क्या इसी भारी-भरकम चढ़ावे और रसूख के कारण धनबाद के डीसी के भी हाथ-पैर फूलने लगे हैं, जिससे वे राम रतन पांडे के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं
​पूरा मामला पीड़ित नागरिक जोशी नरेन्द्र भाई किशोर भाई से जुड़ा है, जिन्होंने अंचल की प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ CPGRAMS पर दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं। पहली शिकायत संख्या PMOPG E 2026 0114421 दिनांक 26 जून 2026 को दर्ज हुई थी, जिसे 109 दिन बीत चुके हैं और फाइल एक इंच आगे नहीं बढ़ी है। वहीं दूसरी शिकायत संख्या PMOPG E 2026 0143896 दिनांक 03 अगस्त 2026 को दर्ज कराई गई थी, जिसके 71 दिन बीतने के बाद भी सन्नाटा पसरा है। आवेदक द्वारा 25 अगस्त और 30 सितंबर को भेजे गए रिमाइंडर पत्रों का भी इन बेपरवाह अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ।
​झरिया अंचल की इस घोर प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्टाचार की बू और मनमर्जी से तंग आकर अब पीड़ित ने राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी मुख्य सचिव, रांची के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मुख्य सचिव से गुहार लगाई गई है कि धनबाद उपायुक्त और झरिया अंचल को तुरंत अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपने का सख्त आदेश दिया जाए। साथ ही कर्तव्य में लापरवाही बरतने, जांच अटकाने और नियमों को ठेंगा दिखाने वाले अंचल निरीक्षक राम रतन पांडे एवं इसमें शामिल अन्य कर्मियों पर तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। अब देखना यह होगा कि मुख्य सचिव के दरबार में मामला पहुंचने के बाद धनबाद के आला अधिकारियों और झरिया अंचल के बेखौफ कर्मियों पर गाज गिरती है या फिर प्रशासनिक सांठगांठ का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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