पाथरडीह में सनसनी: युवती से मिलने पहुंचे तीन युवकों को ग्रामीणों ने बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा, कड़े कानून के तहत तीनों भेजे गए धनबाद कारागार

पाथरडीह में सनसनी: युवती से मिलने पहुंचे तीन युवकों को ग्रामीणों ने बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा, कड़े कानून के तहत तीनों भेजे गए धनबाद कारागार

धनबाद के पाथरडीह और गौशाला ओपी क्षेत्र में बुधवार को हुआ हंगामा अब पूरी तरह से कानूनी और आपराधिक मोड़ ले चुका है। कतरासगढ़ की खेपचाटांड़ बस्ती के रहने वाले जिन तीन युवकों को परिजन लापता बताकर पाथरडीह थाने में गुहार लगा रहे थे, वे वास्तव में पुलिस की गिरफ्त में थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया है और शुक्रवार को उन्हें धनबाद कारागार भेज दिया गया है। पकड़े गए युवकों पर प्राथमिक संख्या 42/2026 के तहत बाल यौन अपराध संरक्षण कानून के अंतर्गत बेहद संगीन मामला दर्ज किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कतरासगढ़ से चासनाला में रिश्तेदार के घर जाने की बात कहकर निकले तीनों युवक बुधवार को सिंदरी मार्ग स्थित कल्याणी शरीफ पुल के पास पहुंचे थे। वहां वे एक स्थानीय युवती से मिलकर शारीरिक संबंध बना रहे थे, तभी इसी दौरान युवती के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने तीनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद नियम-कानून को ताक पर रखकर ग्रामीणों ने खुद ही सजा देने की ठानी और तीनों युवकों की बेल्ट व डंडों से बर्बरतापूर्वक पिटाई कर दी। इस बेरहम पिटाई का एक दृश्य इंटरनेट मंचों पर बड़ी तेजी से प्रसारित हो गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

इस मामले में पुलिस ने अब दोतरफा कार्रवाई की है। गौशाला ओपी प्रभारी शंभू नाथ सिंह ने तीनों आरोपियों को धनबाद कारागार भेज दिया है, जबकि दूसरी ओर कानून को अपने हाथ में लेने वाले ग्रामीणों पर भी पाथरडीह पुलिस ने शिकंजा कसा है। पाथरडीह पुलिस ने मारपीट करने वाले दस से बारह लोगों को हिरासत में ले लिया है और उन्हें पाथरडीह थाने में रखा गया है।

इस पूरे मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है जिसने प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। स्थानीय ग्रामीणों ने खुलेआम कानून हाथ में लेने की जो वजह बताई है, वह बेहद चिंताजनक है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस तो अपनी कार्रवाई करके आरोपियों को कारागार भेज देती है, लेकिन न्यायालय में कुछ ऐसे अधिवक्ता हैं जो धन के बल पर इन अपराधियों को बचा लेते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मोटी रकम लेकर अधिवक्ता अदालत से ऐसे लोगों को छुड़वा देते हैं, जिससे अपराधियों को उचित सजा नहीं मिल पाती। ग्रामीणों ने देश की न्याय व्यवस्था पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि वे देश के सर्वोच्च न्यायालय के कुछ फैसलों से भी काफी असंतुष्ट हैं। यही वजह है कि उन्होंने पुलिस या अदालत का इंतजार करने के बजाय खुद न्याय करने की ठानी। ग्रामीणों ने खुलेआम चेतावनी दी है कि वे अनैतिक संबंध बनाने वालों और ऐसी हरकतों में शामिल होने वालों के खिलाफ आगे भी खुद ही सख्त कदम उठाएंगे।

इस घटना के बाद इलाके में राजनीतिक और नैतिक जवाबदेही को लेकर भी तीखी बहस छिड़ गई है। स्थानीय लोग देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उस पुराने संदेश का हवाला दे रहे हैं जिसमें उन्होंने नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर गहरी चिंता जताई थी और व्यवस्था में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करने की बात कही थी। ग्रामीण अब यह सवाल उठा रहे हैं कि नाबालिग से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद क्या झारखंड के मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा देंगे। फिलहाल पुलिस ने प्राथमिकी संख्या 42/2026 के आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, लेकिन अब देखना यह होगा कि कानून को खुली चुनौती देने वाले और हिरासत में लिए गए अन्य ग्रामीणों पर पुलिस आगे क्या रुख अपनाती है।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now

जवाब जरूर दे 

[poll]

Related Articles

Back to top button
Close
Website Design By Mytesta.com +91 8809666000