महंगे कोचिंग संस्थानों के मुंह पर तमाचा: लातेहार के लालों ने सीमित संसाधनों में रचा इतिहास, नीट परीक्षा में लहराया परचम

महंगे कोचिंग संस्थानों के मुंह पर तमाचा: लातेहार के लालों ने सीमित संसाधनों में रचा इतिहास, नीट परीक्षा में लहराया परचम
​लातेहार / बालूमाथ:
प्रतिभा किसी बड़े शहर या आलीशान सुख-सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, इसे एक बार फिर लातेहार और बालूमाथ के होनहारों ने सच कर दिखाया है। देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में यहाँ के ग्रामीण और छोटे परिवेश से आने वाले बच्चों ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। यह कामयाबी उन बड़े-बड़े विज्ञापनों और महंगे कोचिंग संस्थानों के मुंह पर करारा तमाचा है जो यह दावा करते हैं कि सफलता सिर्फ लाखों रुपये खर्च करने से ही मिलती है।
​चमकते सितारों में ग्राम कुंडी के प्रवीण कुमार ने अपनी जिद और कड़ी मेहनत के दम पर 557 अंक प्राप्त किए हैं। प्रवीण ने यह साबित कर दिया कि अगर रगों में कुछ कर गुजरने का खून दौड़ रहा हो, तो गाँव की पगडंडियों से भी डॉक्टर बनने का रास्ता निकाला जा सकता है। उनकी इस सफलता से पूरे कुंडी ग्राम और पीड़ित परिवार की आँखों में खुशी के आँसू हैं।
​वहीं, बालूमाथ के हुजैफा ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो अनुभव की कमी का बहाना बनाते हैं। हुजैफा ने अपने पहले ही प्रयास में किसी मँझे हुए खिलाड़ी की तरह दांव लगाते हुए 585 अंक और 15,820 ऑल इंडिया रैंक हासिल कर अपनी अद्भुत कुशाग्रता का लोहा मनवाया है। इसी कड़ी में बालूमाथ की ही बेटी आयशा वसी ने भी रूढ़िवादी सोच और सीमित साधनों की बेड़ियों को तोड़ते हुए 578 अंक और 23,000 रैंक हासिल की है। आयशा की इस गूंज ने पूरे क्षेत्र की बेटियों के हौसलों को एक नई उड़ान दी है।
​इन बच्चों की यह अभूतपूर्व सफलता इस बात का जिंदा सुबूत है कि ईमानदारी और पक्के इरादों के आगे संसाधनों की कमी घुटने टेक देती है। आज जब शिक्षा का बाजारीकरण हो चुका है, तब इन तीनों बच्चों ने अपनी मेहनत से यह साबित किया है कि असली ताकत मजबूत इरादों में होती है, महंगे ब्रांड्स में नहीं।
​इस गौरवमयी परिणाम के बाद पूरे लातेहार-बालूमाथ क्षेत्र में जश्न का माहौल है। प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों ने होनहारों के साथ-साथ उनके संघर्षशील माता-पिता और मार्गदर्शन देने वाले गुरुजनों को बधाई दी है। क्षेत्र के लोगों ने उम्मीद जताई है कि ये बच्चे आने वाले दिनों में न सिर्फ बेहतरीन चिकित्सक बनेंगे, बल्कि इसी ईमानदारी के साथ समाज के गरीब और जरूरतमंद तबके की निस्वार्थ सेवा कर चिकित्सा व्यवस्था को एक नया और संवेदनशील चेहरा देंगे

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