सिंदरी के डोमगढ़ में ‘इंजन रिजेक्ट ऑयल’ प्लांट बना काल, सांसों पर पहरा, प्रशासन मौन

सिंदरी के डोमगढ़ में ‘इंजन रिजेक्ट ऑयल’ प्लांट बना काल, सांसों पर पहरा, प्रशासन मौन

धनबाद। सिंदरी। जिले के सिंदरी विधानसभा अंतर्गत डोमगढ़ गांव इन दिनों एक गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा है। गांव के रिहायशी इलाके के बीचों-बीच स्थित एक इंजन रिजेक्ट ऑयल प्लांट (पुराने तेल को रीसाइकिल करने वाली इकाई) स्थानीय ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। प्लांट से निकलने वाले जहरीले काले धुएं और रसायनों की तीखी गंध ने सैकड़ों परिवारों का जीना मुहाल कर दिया है।
बस्ती के बीच मौत का व्यापार: नियमों की अनदेखी
नियमों के अनुसार, ‘इंजन रिजेक्ट ऑयल’ जैसे खतरनाक श्रेणी के उद्योग आबादी से काफी दूर होने चाहिए। लेकिन डोमगढ़ में स्थिति इसके उलट है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट की चिमनियों से निकलने वाला धुआं सीधे लोगों के घरों में प्रवेश कर रहा है, जिससे छोटे बच्चों और बुजुर्गों में दमा, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।
प्रदूषण विभाग और विधायक की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों ने इस समस्या के लिए सीधे तौर पर दो पक्षों को कटघरे में खड़ा किया है:
झारखंड प्रदूषण नियंत्रण विभाग (JSPCB): विभाग ने घनी आबादी के बीच इस तरह के प्लांट को संचालन की अनुमति (NOC) कैसे दी? क्या विभाग की टीम ने कभी यहाँ की वायु गुणवत्ता की जांच की है?
स्थानीय विधायक: सिंदरी विधायक की चुप्पी पर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
ग्रामीणों का दर्द: “रात को सोना हुआ दुश्वार”
स्थानीय निवासी बताते हैं कि रात के समय प्लांट से निकलने वाली गंध इतनी असहनीय हो जाती है कि लोगों को मुंह पर कपड़ा बांधकर सोना पड़ता है। कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
चेतावनी: जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो होगा चक्का जाम
डोमगढ़ के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और प्रदूषण विभाग को अल्टीमेटम दिया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्लांट की जांच कर उसे आबादी से दूर शिफ्ट नहीं किया गया, तो वे सिंदरी-धनबाद मुख्य मार्ग को जाम कर उग्र आंदोलन करेंगे।

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