गौशाला बाजार: ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में ढिबरी युग में जीने को मजबूर झोपड़ी बस्ती

गौशाला बाजार: ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में ढिबरी युग में जीने को मजबूर झोपड़ी बस्ती

प्रशासन की फाइलों में ‘रोशन’, धरातल पर अंधेरा: गौशाला ओपी क्षेत्र की इस बस्ती में अब तक नहीं लगा बिजली का एक भी पोल

गौशाला बाजार धनबाद/झारखंड एक तरफ सरकार हर घर बिजली पहुँचाने का दावा कर रही है, वहीं गौशाला ओपी के ठीक बगल में स्थित झोपड़ी बस्ती सिस्टम की नाकामी की जीती-जागतिक मिसाल बनी हुई है। ताज्जुब की बात यह है कि बाजार के मुख्य हिस्से में चकाचौंध है, लेकिन इस बस्ती के दर्जनों परिवार आज भी अंधेरे में रात गुजारने को विवश हैं। दशकों का इंतजार, सिर्फ मिला आश्वासन बस्ती के निवासियों का कहना है कि चुनाव के समय हर नेता यहाँ वोट मांगने आता है और बिजली का खंभा लगवाने का वादा करता है। लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे फाइलों में दब जाते हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि पास में बिजली की लाइन है, लेकिन उनकी बस्ती तक पोल पहुँचाने की जहमत किसी अधिकारी ने नहीं उठाई। अंधेरे में कट रहा बचपन

बिजली न होने का सबसे बुरा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन यहाँ के छात्र मिट्टी के तेल की कुप्पी या मोमबत्ती के सहारे पढ़ने को मजबूर हैं।

सुरक्षा का खतरा: शाम ढलते ही बस्ती में अंधेरा होने के कारण जहरीले जीव-जंतुओं और असामाजिक तत्वों का डर बना रहता है।

स्वास्थ्य की समस्या: भीषण गर्मी और उमस में बिजली न होने से बुजुर्गों और बीमारों की स्थिति दयनीय हो जाती है। कौन है इस ‘अंधेरगर्दी’ का जिम्मेदार। यह सीधे तौर पर बिजली विभाग की घोर लापरवाही है। सवाल उठता है कि

क्या विभाग के पास इस घनी आबादी वाली बस्ती का नक्शा नहीं है केंद्र और राज्य सरकार की विद्युतीकरण योजनाओं का बजट आखिर कहाँ खर्च हो रहा है। क्या अधिकारियों को किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है अधिकारियों की चुप्पी यह बताती है कि उन्हें गरीबों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। अगर एक सप्ताह के भीतर पोल लगाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो हम विभाग का घेराव करेंगे। बस्ती के आक्रोशित युवा।

निष्कर्ष: गौशाला ओपी झोपड़ी बस्ती की यह तस्वीर विकास के दावों पर एक बड़ा तमाचा है। बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए, वरना जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरने को तैयार है।

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