पाथरडीह फ्रंट डिपो में ‘साहब’ का दौरा करोड़ों के इन्वेस्टमेंट का सपना पर भ्रष्टाचार के रोड रोड़ा’ से अनजान

पाथरडीह फ्रंट डिपो में ‘साहब’ का दौरा करोड़ों के इन्वेस्टमेंट का सपना पर भ्रष्टाचार के रोड रोड़ा’ से अनजान

धनबाद. पाथरडीह रेल महकमे में जब बड़े साहबों का काफिला उतरता है, तो अमूमन फाइलों की धूल झाड़ी जाती है। सोमवार दोपहर करीब 1 बजे पाथरडीह पूर्व मध्य रेल के फ्रंट डिपो में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। धनबाद डीआरएम अभिषेक मिश्रा सीनियर डीएमई रवीश रंजन और एईएन आर के सिंह लाव-लश्कर के साथ औचक निरीक्षण करने पहुंचे।

निरीक्षण का मकसद तो भारी-भरकम था मालगाड़ियों के रखरखाव का जायजा लेना और रेलवे के भविष्य के ‘मुनाफे’ की जमीन तैयार करना। लेकिन जब मीडिया ने जमीनी हकीकत का आईना दिखाया, तो साहबों की अनजानियत ने कई सवाल खड़े कर दिए।

बड़े प्रोजेक्ट बड़ी बातें पर दावों में कितना दम

डीआरएम अभिषेक मिश्रा ने मीडिया को बताया कि पाथरडीह फ्रंट डिपो को एक ‘विशाल हब’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। रेलवे यहां भारी निवेश इन्वेस्टमेंट करने की योजना बना रही है ताकि मालगाड़ियों के रखरखाव में तेजी आए और रेलवे के खजाने में मोटा मुनाफा जुड़े। उन्होंने साफ कहा कि काम की प्रगति देखने के लिए समय-समय पर ऐसे निरीक्षण जरूरी हैं।

 

हैरानी की बात तब हुई जब मीडिया ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रहे घटिया बिल्डिंग मटेरियल और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर सवाल दागा। जहां एक तरफ रेलवे करोड़ों के निवेश और मुनाफे की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

साहब का जवाब जब घटिया मटेरियल के बारे में पूछा गया, तो डीआरएम साहब ने बड़े ही सधे हुए अंदाज में पल्ला झाड़ते हुए कहा फिलहाल हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं है।

क्या करोड़ों के प्रोजेक्ट में हो रहे काम की गुणवत्ता की जानकारी आला अधिकारियों को न होना लापरवाही नहीं है

अगर निर्माण ही ‘घटिया’ सामग्री से होगा, तो क्या रेलवे का यह ‘मुनाफे वाला सपना’ पहली ही बारिश में ढह नहीं जाएगा

क्या औचक निरीक्षण’ सिर्फ फाइलों को दुरुस्त करने के लिए था या वास्तव में जमीन पर हो रही धांधली को रोकना मकसद था

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