बिजली संकट पाथरडीह में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा बीसीसीएल प्रबंधन को दिया 7 दिनों का अल्टीमेटम

बिजली संकट पाथरडीह में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा बीसीसीएल प्रबंधन को दिया 7 दिनों का अल्टीमेटम

धनबाद के झरिया पाथरडीह भाटडीह बस्ती में बिजली संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का गुस्सा बुधवार को बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ फूट पड़ा। एटक AITUC और ग्रामीणों के संयुक्त बैनर तले आक्रोशित लोगों ने पाथरडीह कोल वाशरी स्थित मोनेट वाशरी पहुँचकर बीसीसीएल प्रबंधन को एक ज्ञापन सौंपा।

बैठक में बनी रणनीति, महिलाओं ने की नारेबाजी

प्रदर्शन से पूर्व भाटडीह काली मंदिर के समीप ग्रामीणों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं शामिल हुईं। बिजली न होने से परेशान महिलाओं ने बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उग्र प्रदर्शन किया।

वादे से मुकरा प्रबंधन सांसद प्रतिनिधि

बैठक और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सांसद प्रतिनिधि गफ्फार अंसारी ने बीसीसीएल प्रबंधन पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा

बीते 25 अप्रैल को बीसीसीएल प्रबंधन के साथ हमारी सकारात्मक वार्ता हुई थी, जिसमें वाशरी महाप्रबंधक GM और पीओ PO खुद मौजूद थे। उस समय प्रबंधन ने दो दिनों के भीतर नया ट्रांसफार्मर लगाने का लिखित/मौखिक आश्वासन दिया था। लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी प्रबंधन अपने वादे से मुकर गया है और बस्ती आज भी अंधेरे में डूबी है।

7 दिनों का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने प्रबंधन को दोबारा ज्ञापन सौंपकर साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर बिजली व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया और नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि इसके बाद क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बीसीसीएल प्रबंधन की होगी।

 

 

सांसद प्रतिनिधि गब्बर अंसारी

प्रबंधन ने 25 अप्रैल को दो दिन का समय मांगा था लेकिन आज तक ट्रांसफार्मर नहीं लगा। आज हम फिर से ज्ञापन सौंपकर 7 दिन का समय दे रहे हैं। अगर काम नहीं हुआ तो चक्का जाम और उग्र आंदोलन होगा, जिसकी जिम्मेदारी सिर्फ प्रबंधन की होगी।

कोनिक राय ग्रामीण

बिना बिजली के बच्चों की पढ़ाई बर्बाद हो रही है, गर्मी में जीना मुहाल है। बीसीसीएल सिर्फ आश्वासन देता है, काम नहीं करता। अब हम आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।

मीनाक्षी राय महिला ग्रामीण. घर का सारा काम ठप है। पानी की समस्या हो गई है। अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। प्रबंधन हमारी परेशानी नहीं समझ रहा है, इसलिए आज हम महिलाएं सड़कों पर उतरने को मजबूर हुई हैं।

स्थानीय ग्रामीण. हक की लड़ाई है। बिजली हमारा अधिकार है और जब तक ट्रांसफार्मर नहीं लगेगा, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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