बलियापूर प्रखंड के मुकूंदा पंचायत के हुचूकटाड गांव मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत धनबाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष

बलियापूर प्रखंड के मुकूंदा पंचायत के हुचूकटाड गांव मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत धनबाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह के द्वारा लगाया गया जन चौपाल मे भारी संख्य मे ग्रामीण महिलाओं एंव कांग्रेस कार्यकताओं ने भाग लिया। कार्यकताओं ने जिलाध्यक्ष श्री सिंह का डोल नगाडा से स्वागत किया। मनरेगा कर्मियों को संबोधित करते हुए धनबाद कांग्रेस *जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने कहा* कि कांग्रेस पार्टी गरीब, किसान और मजदूर के हक की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ेगी और मनरेगा के अस्तित्व पर किसी भी प्रकार का आंच नहीं आने देगी।

मोदी सरकार देश और लोकतंत्र के लिये खतरनाक साबित हो रही है। सत्ता के केंद्रीकरण, संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर हस्तक्षेप, विपक्ष की आवाज़ को दबाने की प्रवृत्ति और जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाकर विभाजनकारी राजनीति करना—ये सभी लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रहे हैं।

देश को एकजुट रखने के बजाय समाज को बाँटने का काम किया जा रहा है। बेरोज़गारी, महँगाई, किसानों की बदहाली और गरीबों की समस्याओं पर ठोस समाधान देने के बजाय सरकार प्रचार और भ्रम फैलाने में लगी है।

लोकतंत्र की असली ताकत सवाल पूछने की आज़ादी, संस्थाओं की स्वतंत्रता और जनता के अधिकारों की रक्षा में होती है। जब इन मूल्यों पर चोट होती है, तब देश का भविष्य खतरे में पड़ जाता है। इसलिए आज ज़रूरत है कि हम संविधान, लोकतंत्र और देश की एकता की रक्षा के लिए सजग और संगठित हों।

आज हम यहां “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत एकत्र हुए हैं। यह केवल एक योजना को बचाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि गरीब, मजदूर, किसान और गांव की आत्मसम्मान की लड़ाई है। मनरेगा वह कानून है, जिसने देश के करोड़ों परिवारों को काम का अधिकार दिया, दो वक्त की रोटी का भरोसा दिया और गांवों में विकास की नई उम्मीद जगाई।

लेकिन आज यह योजना खतरे में है। काम के दिन घटाए जा रहे हैं, भुगतान महीनों तक अटकाया जा रहा है, मजदूरी बढ़ाई नहीं जा रही। इससे सबसे ज्यादा नुकसान हमारे गांव के गरीब परिवारों, महिलाओं और आदिवासी भाइयों को हो रहा है। मनरेगा कमजोर होगा तो पलायन बढ़ेगा, भूख बढ़ेगी और गांव फिर से मजबूरी में डूब जाएगा।

मनरेगा केवल मजदूरी नहीं देता—

यह गांव में तालाब बनाता है, सड़क बनाता है, खेतों को पानी देता है, और आत्मनिर्भरता का रास्ता खोलता है। यह सम्मान के साथ काम करने का अधिकार है।

हम पूछते हैं—

क्या गरीब का हक छीनना विकास है?

क्या मजदूर को समय पर मजदूरी न देना न्याय है?

क्या गांव को खाली करना राष्ट्रनिर्माण है? कार्यक्रम में सर्व श्री

संतोष मोदक, सलेंद्र प्रसाद सिंह, राजु बाउरी, गौतम सिंह, जयदेव बाउरी, अशोक महतो, सुरेश रवानी, रंजीत सिंह, मनोज मोदक, सरोज मजुमदार,सोनू बाउरी, सुमित बाउरी, सुनील रवानी, उमेश भुइंया, विकास कुमार सिंह, अर्जुन गोराई, विष्णु बाउरी, राजकुमार बाउरी और इत्यादि।

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