कोयला ‘सिंडिकेट’ का खेल: धनबाद के ‘कप्तान’ की खामोशी या मौन सहमति?

कोयला ‘सिंडिकेट’ का खेल: धनबाद के ‘कप्तान’ की खामोशी या मौन सहमति?

धनबाद। कतरास कोयलांचल की धरती से काले हीरे की डकैती का खेल कोई नया नहीं है, लेकिन जोगता थाना क्षेत्र में जो हो रहा है, वह प्रशासन की कार्यशैली पर कालिख पोतने के लिए काफी है। सिजुआ स्टेडियम के पीछे स्थित जोगता साइडिंग अब ‘लूट का नया केंद्र’ बन गई है, जहाँ से हर रात करोड़ों का कोयला बिना किसी डर के ट्रकों में भरकर मंडियों तक पहुँच रहा है।

‘कप्तान’ साहब की सरपरस्ती में चलता काला कारोबार।

क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म है कि बिना ‘ऊपर’ की सेटिंग के इतना बड़ा साम्राज्य नहीं चल सकता। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि धनबाद के ‘कप्तान’ पुलिस कप्तान की जानकारी में यह सब हो रहा है।

जनता के मन में उठते चुभते सवाल:

क्या ज़िले के सबसे बड़े अधिकारी के खुफिया तंत्र Intelligence Cell को इन ट्रकों की गड़गड़ाहट सुनाई नहीं देती?

जब ज़िला मुख्यालय से ‘जीरो टॉलरेंस’ के निर्देश जारी होते हैं, तो जोगता साइडिंग पर वे आदेश कागजी क्यों हो जाते हैं

क्या यह ‘ऊपर से नीचे तक’ बँटते कमीशन का नतीजा है कि खाकी ने अपनी वर्दी का फर्ज माफियाओं के आगे गिरवी रख दिया है

रात का सन्नाटा और माफिया का राज

रात 11 बजे के बाद जोगता का मंजर किसी फिल्म के सीन जैसा होता है। बिना चालान के ओवरलोडेड ट्रक, जिन पर न तो नंबर प्लेट साफ होती है और न ही पुलिस का खौफ। ये ट्रक जब सड़कों पर दौड़ते हैं, तो स्थानीय गश्ती दल या तो रास्ता बदल लेता है या फिर आँखों पर पट्टी बांध लेता है।

वर्दी पर दाग और व्यवस्था का मजाक

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग की मिलीभगत इस अवैध कारोबार की रीढ़ है। अगर ‘कप्तान’ साहब की नीयत साफ होती, तो एक भी ट्रक बिना वैध कागजात के जिले की सीमा पार नहीं कर पाता। यह महज चोरी नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति की दिन-दहाड़े डकैती है जिसे वर्दी का संरक्षण प्राप्त है।

चेतावनी अगर जल्द ही इस ‘कैप्टन-माफिया’ नेक्सस Gathbandhan पर प्रहार नहीं किया गया, तो जोगता की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। आखिर कब तक जनता के टैक्स और देश की संपत्ति पर ये ‘रक्षक’ ही ‘भक्षक’ बनकर डाका डालते रहेंगे।

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