खूनी बालू का तांडव सुदामडीह में रसूखदारों के बीच जंग गोलियों की गूँज पर पुलिस का पर्दा

खूनी बालू का तांडव सुदामडीह में रसूखदारों के बीच जंग गोलियों की गूँज पर पुलिस का पर्दा

चासनाला कोयलांचल की सड़कों पर अवैध बालू लदे ट्रैक्टर यमराज बनकर दौड़ रहे हैं, और जब ये रसूख से टकराते हैं, तो सड़कों पर खून बहता है। सोमवार की रात सुदामडीह रिवर साइड इलाका रणक्षेत्र बन गया। एक तरफ आउटसोर्सिंग प्रबंधक की पावर थी तो दूसरी तरफ अवैध बालू ढोते ट्रैक्टर का दुस्साहस। नतीजा सिर फूटे, रड चली और चर्चा है कि दो राउंड गोलियों की गूँज ने इलाके को थर्रा दिया।

घटना तब शुरू हुई जब डेको आउटसोर्सिंग प्रबंधक मधु सिंह को छोड़कर लौट रही स्कार्पियो को एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ने टक्कर मार दी। चालक राधेश्याम यादव ने जब अवैध रफ़्तार पर टोकना चाहा तो ट्रैक्टर मालिक शिवम यादव अपनी फौज समर्थकों के साथ लाठी-डंडे और लोहे की रॉड लेकर टूट पड़ा।

सरेराह गुंडागर्दी बीच सड़क पर जमकर तांडव हुआ। स्कार्पियो चालक और बॉडीगार्ड को लहूलुहान कर दिया गया।

पिस्तौल पर झपट्टा आरोप है कि बालू सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने बॉडीगार्ड की लाइसेंसी पिस्टल छीनने की कोशिश की

इस पूरी घटना में सबसे सनसनीखेज पहलू ‘फायरिंग’ है। स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो इलाके में दो राउंड गोलियां चलीं। ट्रैक्टर मालिक शिवम खुद चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि उस पर फायरिंग हुई। लेकिन हैरानी की बात यह है कि खाकी को न गोली की आवाज सुनाई दी न बारूद की गंध आई।

पुलिसिया राग थाना प्रभारी आकृष्ट अमन का रटा-रटाया बयान सामने आया मारपीट हुई है, पर फायरिंग बेबुनियाद है।

जानकार बताते हैं कि पुलिस द्वारा फायरिंग की बात को दबाना असल में उस अवैध बालू सिंडिकेट को बचाना है, जो रात के अंधेरे में सुदामडीह की सड़कों पर राज करता है। अगर फायरिंग की बात दर्ज होती है, तो मामला संगीन धाराओं में जाएगा और फिर सफेदपोशों के अवैध धंधे पर आंच आएगी।

क्या पुलिस लिखित शिकायत के इंतजार में किसी बड़ी लाश के गिरने का इंतजार कर रही है? जब सरेराह खून बह रहा हो और हथियार लहराए जा रहे हों तो क्या सुओ मोटो स्वत संज्ञान लेकर कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी नहीं

पाथरडीह से मुजाहिद की बेबाक रिपोर्ट।

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