BIT सिंदरी निर्माण कार्य में विवाद सुपरवाइजर ने स्वीकारा पैसे के लेनदेन और फोन न उठाने के कारण हमने रखी है बाइक

BIT सिंदरी निर्माण कार्य में विवाद सुपरवाइजर ने स्वीकारा पैसे के लेनदेन और फोन न उठाने के कारण हमने रखी है बाइक

धनबाद सिंदरी BIT सिंदरी परिसर में चल रहे भवन निर्माण कार्य में पेटी कॉन्ट्रैक्टर और मुख्य कंपनी के बीच का विवाद अब पुलिस की दहलीज तक पहुँच गया है। ओझा बस्ती चासनाला निवासी पेटी कॉन्ट्रैक्टर विश्वजीत ओझा ने निरंजन राय प्राइवेट लिमिटेड के सुपरवाइजरों पर मारपीट और बाइक छीनने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर कंपनी के सुपरवाइजर ने दूरभाष पर अपना पक्ष रखते हुए बाइक कब्जे में होने की बात स्वीकार की है।

पीड़ित का आरोप बंधक बनाकर कराया जबरन हस्ताक्षर पीड़ित विश्वजीत ओझा का आरोप है कि सुपरवाइजर बीरांची सिंह और तपन शर्मा ने उन्हें कार्यालय में बुलाकर 10-12 लोगों के साथ मिलकर घेरा, गाली-गलौज की और मारपीट की। आरोप है कि उन्हें जान से मारने की धमकी देकर जबरन फाइनल बिल पर हस्ताक्षर कराए गए और उनकी मोटरसाइकिल JH10BG 7253 छीन ली गई। पीड़ित ने यह भी बताया कि तपन शर्मा अपने भाई के प्रशासनिक पद IAS का धौंस दिखाकर उन्हें डरा रहे हैं।

सुपरवाइजर का पक्ष हिसाब हो चुका है, फोन नहीं उठाने पर रखी बाइक

इस पूरे मामले पर जब निरंजन राय प्राइवेट लिमिटेड के सुपरवाइजर बीरांची सिंह से दूरभाष Mobile पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने मारपीट के आरोपों को नकारते हुए एक अलग पक्ष रखा।

बीरांची सिंह ने बताया कि विश्वजीत ओझा के अकाउंट में एक बार पेमेंट डाल दिया गया था और एक बार हमने खुद उन्हें नकद Cash भुगतान कर दिया है। चूंकि वे हमारा फोन नहीं उठा रहे थे इसलिए सुरक्षा के लिहाज से हमने उनकी बाइक अपने पास रख ली है।

कानूनी पेंच क्या निजी व्यक्ति को बाइक जब्त करने का अधिकार है

सुपरवाइजर के इस बयान ने उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा कर दिया है। कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी भी वित्तीय विवाद या फोन न उठाने की स्थिति में किसी की बाइक या निजी संपत्ति को जबरन अपने कब्जे में रखना लूट Loot या जबरन वसूली Extortion की श्रेणी में आता है। कोई भी निजी कंपनी या व्यक्ति पुलिस या कोर्ट की अनुमति के बिना किसी का वाहन जब्त नहीं कर सकता।

प्रशासन से न्याय की गुहार विश्वजीत ओझा ने गौशाला ओपी में लिखित शिकायत देकर अपनी बाइक बरामद करने और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब गेंद पुलिस के पाले में है कि वह इस ‘स्वीकारोक्ति’ के बाद क्या कदम उठाती है।

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