सिंदरी बस्ती पेयजल संकट तीन दिवसीय धरने के बाद झुका हर्ल प्रबंधन एक माह में कार्य शुरू करने का लिखित आश्वासन

सिंदरी बस्ती पेयजल संकट तीन दिवसीय धरने के बाद झुका हर्ल प्रबंधन एक माह में कार्य शुरू करने का लिखित आश्वासन

सिंदरी। सिंदरी बस्ती की प्यास बुझाने के लिए पिछले तीन दिनों से सिंदरी सेटलिंग टैंक के गेट पर भाकपा माले के बैनर तले चल रहा धरना रविवार को समाप्त हो गया। यह सफलता हर्ल प्रबंधन, विधायक चंद्रदेव महतो और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच हुई एक मैराथन वार्ता के बाद मिली।

हर्ल प्रबंधन के सम्मेलन कक्ष में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी है:

पाइपलाइन निर्माण: नई पाइपलाइन बिछाने हेतु टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। प्रबंधन ने लिखित में दिया है कि 30 दिनों के भीतर धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।

तात्कालिक राहत: ग्रामीणों की वर्तमान समस्या को देखते हुए मौजूदा पाइपलाइन से 1 से 2 अस्थायी कनेक्शन तुरंत दिए जाएंगे।

चेतावनी: विधायक चंद्रदेव महतो ने स्पष्ट लहजे में कहा कि यदि एक महीने के भीतर मशीनें नहीं चलीं, तो अगला आंदोलन हर्ल गेट पर होगा जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रबंधन की होगी।

आक्रोश 9 महीने का इंतजार और कितना

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉमरेड छोटन चटर्जी ने प्रबंधन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि

9 महीने पहले भी यही वादे किए गए थे। प्रबंधन अब तक ग्रामीणों को कार्य प्रारंभ होने की भ्रामक सूचनाएं देकर गुमराह करता रहा है। यह लिखित समझौता हमारी जीत का पहला कदम है, अंतिम नहीं।

धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं और बुजुर्गों ने इस लिखित आश्वासन को आंशिक जीत बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अब केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर काम देखना चाहते हैं।

इस महत्वपूर्ण वार्ता और धरने में मुख्य रूप से कॉमरेड छोटन चटर्जी, सुरेश प्रसाद, राजीव मुखर्जी, मिथुन मंडल, जयदेव पाल, भैरव मंडल, धनंजय, तापस, मिठू, पीयूष, बसंत, टुंपा चटर्जी, जोबा मल्लिक सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सिंदरी सेटलिंग टैंक से धरना भले ही हट गया हो, लेकिन प्रशासन और प्रबंधन के लिए यह एक महीने की समयसीमा ‘अल्टीमेटम’ की तरह है। अब सबकी नजरें मई के अंतिम सप्ताह पर टिकी हैं।

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