लोदना ओपी या ‘कोयला माफिया’ का हेडक्वार्टर ड्राइवर बना अघोषित थानेदार, खाकी शर्मसार

लोदना ओपी या ‘कोयला माफिया’ का हेडक्वार्टर ड्राइवर बना अघोषित थानेदार, खाकी शर्मसार

झरिया में लोकतंत्र शर्मसार खाकी के पहरे में ‘काले सोने की डकैती
धनबाद के झरिया में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है और ‘सिस्टम’ पूरी तरह माफियाओं के कदमों में नतमस्तक है। यहाँ सत्ता के गलियारों से लेकर पुलिस की चौखट तक भ्रष्टाचार की ऐसी कालिख पुती है कि आम जनता की गुहार नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह गई है। लोदना ओपी OP क्षेत्र में जो कुछ हो रहा है वह सिर्फ कोयला चोरी नहीं बल्कि राज्य सरकार जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत का एक जीता-जागता सबूत है।
ड्राइवर का आतंक या ऊपर तक पहुँच
लोदना ओपी का ड्राइवर जितेंद्र पाण्डेय इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। एक साधारण ड्राइवर की इतनी जुर्रत कि वह खुद को ‘सुपर थानेदार’ समझने लगे सूत्रों का कहना है कि यह ड्राइवर महज एक प्यादा है, जिसके पीछे ओपी प्रभारी और धनबाद एसएसपी के आदेशों की ढाल काम कर रही है। बिना उच्चाधिकारियों की मौन सहमति के पुलिस की गाड़ी चलाने वाला शख्स पूरे इलाके में अवैध कोयले का समानांतर साम्राज्य खड़ा नहीं कर सकता।
बालूगद्दा बना माफिया का हेडक्वार्टर
लोदना ओपी अंतर्गत बालूगद्दा खिलान धौड़ा बस्ती के पीछे अवैध कोयले का विशाल भंडार जमा किया जा रहा है। रात होते ही यहाँ खाकी की सुरक्षा में बड़े-बड़े वाहनों का तांता लग जाता है। यह कोयला सीधे गोविंदपुर की भट्टियों में खपाया जा रहा है। सुशी आउटसोर्सिंग परियोजना से सरेआम मोटरसाइकिल और ट्रकों से हो रही तस्करी यह बताने के लिए काफी है कि पुलिस और CISF ने माफिया के साथ मिलकर लूट की संधि कर ली है।
पार्टी कोई भी हो कमीशन का रंग एक है
झरिया की विडंबना देखिए राज्य में झामुमो JMM की सरकार है, जो जल-जंगल-जमीन की रक्षा का दावा करती है। वहीं धनबाद में भाजपा BJP के कद्दावर सांसद और झरिया में भाजपा की विधायक का प्रतिनिधित्व है। बावजूद इसके जनता पूछ रही है कि आखिर कोयला माफिया किसका सगा है
क्या सत्ता पक्ष की शह पर प्रशासन मौन है
या विपक्ष की मौन सहमति’ के पीछे भी कोई बड़ा खेल चल रहा है
जनता देख रही है कि झंडा किसी भी पार्टी का हो कोयले की कालिख से सबकी जेबें गरम हो रही हैं।
चीखती महिलाएं और सोता प्रशासन
बस्ती की महिलाओं ने जब इन तस्करों को रोकने की कोशिश की, तो उन्हें न्याय के बदले भद्दी गालियां और डराने-धमकाने का सामना करना पड़ा। रात भर वाहनों का शोर और गुंडों का जमावड़ा स्थानीय लोगों की नींद उड़ा चुका है। रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं और थाना का ड्राइवर ही जब रसूख दिखाने लगे, तो गरीब जनता आखिर जाए कहाँ
एसएसपी साहब क्या यह आपकी जीरो टॉलरेंस नीति है

धनबाद के SSP कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। क्या उन्हें खबर नहीं कि उनके नाम पर एक ड्राइवर अवैध साम्राज्य चला रहा है या फिर यह सब ‘ऊपर’ तक हिस्सा पहुँचाने का एक सुनियोजित जरिया है झरिया की जनता अब खोखले आश्वासनों से ऊब चुकी है उन्हें कार्रवाई चाहिए, मिलीभगत करने वाले पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी चाहिए।

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