धनबाद में कलम की आड़ में बालू का काला खेल माफिया पुलिस और खास पत्रकारों का त्रिकोणीय गठजोड़

धनबाद में कलम की आड़ में बालू का काला खेल माफिया पुलिस और खास पत्रकारों का त्रिकोणीय गठजोड़

धनबाद: कोयलांचल में अवैध खनन का जाल कितना गहरा है इसका अंदाजा सुदामडीह से सिंदरी के बीच चल रहे बालू के खेल से लगाया जा सकता है। ताज़ा खुलासे के मुताबिक, इस अवैध कारोबार को न केवल स्थानीय पुलिस और माइनिंग विभाग का मौन समर्थन प्राप्त है बल्कि क्षेत्र के कुछ कथित पत्रकारों का संरक्षण भी इस सिंडिकेट को अभयदान दे रहा है।

सूत्रों के अनुसार, सुदामडीह से चलकर गौशाला और कांडरा बाजार होते हुए सिंदरी जाने वाले बालू लदे ट्रैक्टरों में से कई स्वयं कुछ पत्रकारों के हैं। यह चौथा स्तंभ अब बालू माफियाओं के लिए ढाल का काम कर रहा है। जब भी प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बनता है, ये संरक्षण प्राप्त पत्रकार अपनी रसूख का इस्तेमाल कर कार्रवाई को रुकवा देते हैं या पहले ही सूचना लीक कर देते हैं।

संरक्षण का खेल कुछ पत्रकार पुलिस और माइनिंग अधिकारियों के बीच सेतु का काम करते हैं ताकि ट्रैक्टरों का आवागमन निर्बाध रूप से जारी रहे।

दबदबा कांडरा बाजार और गौशाला क्षेत्र में शाम 6 बजे के बाद जो ट्रैक्टरों का तांता लगता है, उनमें से कई पर प्रेस या पत्रकार का स्टीकर लगा होने की भी चर्चा है ताकि चेकिंग के दौरान उन्हें रोका न जाए।

सूचना तंत्र। सुदामडीह से सिंदरी तक के इस रूट पर इन पत्रकारों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि किसी भी आधिकारिक हलचल की खबर माफियाओं तक मिनटों में पहुँच जाती है।

क्या धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक SSP और जिला खनन पदाधिकारी DMO उन काली भेड़ों पर नकेल कसेंगे जो पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे को ढाल बनाकर अवैध कमाई में जुटे हैं स्थानीय जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि जब खबर लिखने वाले ही खबर का हिस्सा बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए

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