थाने की नाक के नीचे सरकारी संपत्ति की राजनीतिक डकैती सिंदरी में बिजली कार्यालय पर झंडों की जंग क्या बनेगा प्रेस क्लब

थाने की नाक के नीचे सरकारी संपत्ति की राजनीतिक डकैती सिंदरी में बिजली कार्यालय पर झंडों की जंग क्या बनेगा प्रेस क्लब

सिंदरी धनबाद कानून के रखवालों की सरपरस्ती का इससे बड़ा नमूना क्या होगा कि सिंदरी थाने से महज 150 मीटर और FCI मेन गेट से 200 मीटर की दूरी पर स्थित रोहराबांध का पुराना बिजली कार्यालय अब नेताओं की ‘राजनीतिक चारागाह’ बन चुका है। जिस लावारिस पड़ी सरकारी संपत्ति की हिफाजत प्रशासन को करनी चाहिए थी, उस पर अब खुलेआम वर्चस्व और कब्जे की डर्टी पॉलिटिक्स जारी है।
सरकारी भवन एक है, लेकिन इस पर ‘गिद्ध दृष्टि’ जमाए दावेदार अनेक। फिलहाल इस परिसर पर कांग्रेस, झामुमो JMM और झारखंड मजदूर संघ ने अपना त्रिस्तरीय कब्जा जमा रखा है। रही-सही कसर पूरी करने के लिए अब भारतीय जनता पार्टी BJP ने भी एंट्री मार दी है और अपनी दावेदारी का झंडा गाड़ने में पीछे नहीं है।
प्रशासन की लाचार मौन सहमति’
हैरत की बात यह है कि खाकी और खादी का यह पूरा खेल पुलिस प्रशासन की नाक के ठीक नीचे चल रहा है। सार्वजनिक संपत्ति की इस सरेआम हो रही ‘बंदरबांट’ पर पुलिस और स्थानीय निकाय की कुंभकर्णी नींद कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या प्रशासन का मौन ही इन कब्जाधारियों के लिए शह बना हुआ है
नेताओं की नौटंकी के बीच पत्रकारों की तार्किक पहल
जहाँ एक तरफ राजनीतिक दल सरकारी ढांचों की छील-छाल में मस्त हैं, वहीं स्थानीय पत्रकारों ने एक जनहितकारी समाधान पेश किया है। मीडियाकर्मियों का कहना है कि नेताओं के अनधिकृत कब्जों की होड़ से इस कीमती संपत्ति को बचाकर इसे आधिकारिक रूप से ‘प्रेस क्लब’ घोषित कर देना चाहिए। अगर सभी दल आपसी खींचतान छोड़कर इसे प्रेस क्लब बनाने में सहमति देते हैं, तो न सिर्फ सरकारी संपत्ति की बर्बादी रुकेगी, बल्कि जनता की आवाज उठाने वाले पत्रकारों को एक साझा मंच मिलेगा जिसका फायदा सीधे तौर पर आम जनता को होगा।
अब देखना यह है कि पावर कॉरिडोर के पास खड़े इस लावारिस भवन पर किसका झंडा टिकता है, या फिर कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन होश में आकर कोई सख्त कार्रवाई करता है।

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