जन स्वास्थ्य अभियान के 25 वर्ष पूरे होने पर जन स्वास्थ्य अभियान संगठन और 20 से अधिक राज्यों के नेटवर्क व

जन स्वास्थ्य अभियान के 25 वर्ष पूरे होने पर जन स्वास्थ्य अभियान संगठन और 20 से अधिक राज्यों के नेटवर्क व संगठनों के सहयोग से ‘स्वास्थ्य अधिकारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ 11-12 दिसंबर को देश की राजधानी नई दिल्ली के जवाहर भवन में शुरू हुई।

इस सम्मेलन आमंत्रित सिंदरी के समाजसेवी विकास कुमार ठाकुर ने बताया कि 20 से अधिक राज्यों के नेटवर्क और संगठनों के सहयोग से यह आयोजन हो रहा है साथ हीं यह आयोजन देश भर से 300 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी, सामाजिक संगठनों के सदस्य, शोधकर्ता, जन स्वास्थ्य कार्यकर्ता सम्मेलन में अनुभव साझा करेंगे और आने वाले दशक के लिए स्वास्थ्य एजेंडा तैयार करेंगे।

सम्मेलन का उद्देश्य कोविड संकट से सबक लेना और स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते बाजारीकरण का सशक्त विकल्प प्रदान करना है। सरकारी अस्पतालों के संसाधनों को सीमित करना, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) का विस्तार करते हुए मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों को निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया तेज हो रही है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता मानते हैं कि पीपीपी योजनाएं, सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए मुनाफाखोरी को बढ़ाती हैं। इससे अंततः गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के लिए इलाज महंगा हो जाता है।

सम्मेलन में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, झारखंड, मुंबई और गुजरात जैसे स्थानों पर निजीकरण के खिलाफ चल रहे संघर्षों के कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाया जाएगा। इसके अलावा 15 वर्ष पहले पारित किया गया क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट (सीईए) अभी प्रभावी तरीके से लागू नहीं हुआ है। इस वजह से निजी अस्पतालों में मुनाफाखोरी, बेहिसाब फीस और बिना वजह के टेस्ट व इलाज को बढ़ावा मिलता है।

समाजसेवी विकास कुमार ठाकुर ने कार्यक्रम में भाग लेते हुए बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन का एक मुख्य विषय है – निजी अस्पतालों की मनमानी रोकना और मरीजों के अधिकारों की रक्षा करना है।

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