चोरी का आवेदन मिलने के वाबजूद क्यों नहीं कर रहे जोरापोखर थाना प्रभारी एफआईआर?

चोरी का आवेदन मिलने के वाबजूद क्यों नहीं कर रहे जोरापोखर थाना प्रभारी एफआईआर?

झरिया। झरिया विधानसभा के अंतर्गत पड़नेवाली अनील टॉकीज वेडिंग बेल्स हॉल में हो रहे विवाह समारोह के बाद अहले सुबह 24 दिसंबर को लगभग तीन से चार बजे के आसपास अनुमानित लगभग 200 खाम रकम भरा एवं बेटी – दामाद को मिला गिफ्ट के साथ एक बैग में लगभग रखा 80 हजार भी लॉज से चोरी कर चोर उड़नछू हो गए।
उपरोक्त आकस्मिक घटना के बाद जहाँ पुलिस प्रशासन को पीड़ित मो. मोजाहरुल इस्लाम अंसारी को मदद करना चाहिए उसके विपरीत पीड़ित के आवेदन पर अभी तक विचार – विमर्श तथा जाँच चल रही है। जबकि आवेदन में पीड़ित के द्वारा दिए नामित अपराधी मास्टरमाइंड नीरज सिंह के सहयोगी मनोज रवानी टीम ने चोरी कर पुरे विवाह आयोजन का माहौल ख़राब कर विवाह का मजा को किडकीड़ा कर दिया। उसके बाद से अपने ही धन की हानि का आवेदन ले कर थाना का चक्कर काटना पड़ रहा है, जबकि कानूनी प्रक्रिया को सुचारु रूप से क्रियान्वित करने के लिए जीरो एफ आई आर भी की जा सकती है। उसके बाद पता चलने के बाद की किस थाना का केस है आदि का निर्णय ले लिया जायेगा। किन्तु प्रमुख मसला है कि विवाह में चोरी की घटित घटना एवं चोरी के रकम की वापसी का रास्ता ढूंढना, जो प्रशासन के बस की बात नहीं जान पड़ने के कारण शायद इसी बाबत अभी तक प्रशासन की तरफ से एफआईआर नहीं की जा रही।

चोरी का आवेदन मिलने के वाबजूद क्यों नहीं कर रहे जोरापोखर थाना प्रभारी एफआईआर?

झरिया। झरिया विधानसभा के अंतर्गत पड़नेवाली अनील टॉकीज वेडिंग बेल्स हॉल में हो रहे विवाह समारोह के बाद अहले सुबह 24 दिसंबर को लगभग तीन से चार बजे के आसपास अनुमानित लगभग 200 खाम रकम भरा एवं बेटी – दामाद को मिला गिफ्ट के साथ एक बैग में लगभग रखा 80 हजार भी लॉज से चोरी कर चोर उड़नछू हो गए।

उपरोक्त आकस्मिक घटना के बाद जहाँ पुलिस प्रशासन को पीड़ित मो. मोजाहरुल इस्लाम अंसारी को मदद करना चाहिए उसके विपरीत पीड़ित के आवेदन पर अभी तक विचार – विमर्श तथा जाँच चल रही है। जबकि आवेदन में पीड़ित के द्वारा दिए नामित अपराधी मास्टरमाइंड नीरज सिंह के सहयोगी मनोज रवानी टीम ने चोरी कर पुरे विवाह आयोजन का माहौल ख़राब कर विवाह का मजा को किडकीड़ा कर दिया। उसके बाद से अपने ही धन की हानि का आवेदन ले कर थाना का चक्कर काटना पड़ रहा है, जबकि कानूनी प्रक्रिया को सुचारु रूप से क्रियान्वित करने के लिए जीरो एफ आई आर भी की जा सकती है। उसके बाद पता चलने के बाद की किस थाना का केस है आदि का निर्णय ले लिया जायेगा। किन्तु प्रमुख मसला है कि विवाह में चोरी की घटित घटना एवं चोरी के रकम की वापसी का रास्ता ढूंढना, जो प्रशासन के बस की बात नहीं जान पड़ने के कारण शायद इसी बाबत अभी तक प्रशासन की तरफ से एफआईआर नहीं की जा रही।

धनबाद पुलिस की कार्यशील पर सवाल खड़ा कर देती है।

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