तीसरा थाना कोयलांचल में अवैध उत्खनन और प्रशासनिक मौन पर सवाल।

तीसरा थाना कोयलांचल में अवैध उत्खनन और प्रशासनिक मौन पर सवाल।

धनबाद: झारखंड के धनबाद जिला अंतर्गत तीसरा थाना क्षेत्र इन दिनों अवैध कोयला तस्करी के बड़े केंद्र के रूप में चर्चा में है। स्थानीय सूत्रों और मिल रही शिकायतों के अनुसार, क्षेत्र में मुकेश सिंह नामक व्यक्ति के नेतृत्व में प्रतिदिन लगभग 40 ट्रक अवैध कोयले की निकासी की जा रही है। आरोप है कि यह खेल स्थानीय पुलिस (थाना प्रभारी) और कोयला माफिया की कथित मिलीभगत से बेधड़क चल रहा है, जिससे सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है।

मिलीभगत के आरोप: स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि तीसरा थाना प्रभारी की जानकारी के बावजूद यह अवैध कारोबार रुक नहीं रहा है। तस्करी के लिए फर्जी दस्तावेजों और ‘मैनेजमेंट’ का सहारा लिया जा रहा है।

प्रशासनिक कार्रवाई: हालांकि, हाल के महीनों (नवंबर 2025 – जनवरी 2026) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धनबाद में कई बड़े कोयला कारोबारियों (जैसे एलबी सिंह, अनिल गोयल, मनोज अग्रवाल) के ठिकानों पर छापेमारी की है, जिससे माफिया तंत्र में हड़कंप मचा है।

हाई कोर्ट की सख्ती: जनवरी 2026 में झारखंड हाई कोर्ट ने धनबाद में अवैध खनन और प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि अवैध माइनिंग रोकने के लिए अब तक क्या पुख्ता कदम उठाए गए हैं।

राजनीतिक रार: पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि कोयला तस्करी में पुलिस के आला अधिकारी और ‘सत्ता के गलियारे’ शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से एसएसपी और स्थानीय थाना प्रभारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

जिम्मेवार कौन?

पुलिस अधीक्षक (SP/SSP): जिले की कानून व्यवस्था के मुखिया होने के नाते, यदि किसी थाने में अवैध काम हो रहा है, तो उसकी सीधी जवाबदेही एसएसपी की बनती है।

धनबाद सांसद: क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के नाते सांसद की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे इस बड़े घोटाले को केंद्र और राज्य स्तर पर उठाएं, हालांकि पुलिस पर सीधा नियंत्रण राज्य सरकार का होता है।

खनन विभाग एवं CISF: कोयला खदानों की सुरक्षा के लिए तैनात CISF और जिला खनन कार्यालय की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है।

तीसरा थाना क्षेत्र में हो रही यह लूट केवल संसाधनों की चोरी नहीं, बल्कि पर्यावरण और सुरक्षा के लिए भी खतरा है। जब तक निचले स्तर के अधिकारियों (थाना प्रभारी) पर ठोस कानूनी कार्रवाई और संपत्ति की जांच नहीं होगी, तब तक ऐसे ‘सिंडिकेट’ को तोड़ना मुश्किल होगा।

हालांकि अब यह देखना है समाचार चलने के बाद थाना प्रभारी के ऊपर कानूनी कार्रवाई होती है या लीपा पोती होगी।

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