सिंदरी FCIL आवासों पर गहराया संकट अधिकारी बोले राजनीतिक हस्तक्षेप ही एकमात्र रास्ता

सिंदरी FCIL आवासों पर गहराया संकट अधिकारी बोले राजनीतिक हस्तक्षेप ही एकमात्र रास्ता

धनबाद सिंदरी के भविष्य और हजारों निवासियों के आशियाने को लेकर चल रही खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। जोशी न्यूज़ की पड़ताल में FCIL प्रबंधन और उर्वरक मंत्रालय का सख्त रुख सामने आया है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

प्रशासनिक स्पष्टीकरण पॉलिटिकल पावर से ही थमेगी प्रक्रिया

विधायक चंद्र देव महतो के साथ हुई वार्ता में FCIL के अधिकारी देवदास ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में चल रही अधिग्रहण की कार्रवाई को प्रशासनिक स्तर पर रोकना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मामला अब पूरी तरह ‘पॉलिटिकल पावर’ के अधीन है और दिल्ली से मिलने वाले राजनीतिक निर्देशों के बाद ही कोई बदलाव संभव है।

उर्वरक मंत्रालय का पक्ष सरकारी जमीन और राजस्व प्राथमिकता

उर्वरक मंत्री ने मीडिया को जानकारी देते हुए साफ किया कि यह पूरी भूमि सरकारी है और किसी की निजी संपत्ति नहीं है। अधिग्रहण के पीछे के मुख्य उद्देश्य साझा करते हुए उन्होंने बताया:

राजस्व में वृद्धि: जमीन के अधिग्रहण का मकसद केंद्र और राज्य सरकार के राजस्व Tax को बढ़ाना है।

SAIL Steel Authority of India Limited को आवंटन इस भूमि को सेल SAIL एवं अन्य प्रमुख अधिकारियों और इकाइयों को आवंटित किया जा रहा है ताकि औद्योगिक विकास और सरकारी लाभ में बढ़ोतरी हो सके। बैठक में उपस्थित रहे प्रमुख चेहरा

स्थानीय लोगों के समर्थन में आयोजित इस बैठक में विधायक के साथ कई कद्दावर नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से

कौशल सिंह, शशि सिंह, प्रशांत दुबे, दीपेंद्र झा और सुरेश प्रसाद।

वार्ड 54 के पार्षद धीरज सिंह एवं भारी संख्या में स्थानीय समर्थक।

इन सभी ने एक स्वर में सिंदरी के निवासियों के लिए स्थायी लीज’ की मांग का समर्थन किया।

जोशी न्यूज़ विशेष जहाँ एक तरफ सरकार सेल SAIL जैसे उपक्रमों को जमीन देकर टैक्स बढ़ाना चाहती है, वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने चुनौती है कि वे इस ‘पॉलिटिकल पावर’ का इस्तेमाल कर हजारों परिवारों को बेघर होने से कैसे बचाते हैं।

 

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