ग्रामीणों की एकजुटता और हक की जीत: बालूमाथ में भारी विरोध के बाद NTPC माइनिंग प्रोजेक्ट की जनसुनवाई रद्द

ग्रामीणों की एकजुटता और हक की जीत: बालूमाथ में भारी विरोध के बाद NTPC माइनिंग प्रोजेक्ट की जनसुनवाई रद्द
नियमों को ताक पर रखकर प्रखंड मुख्यालय में कराई जा रही थी जनसुनवाई, जिला परिषद उपाध्यक्ष ने खुलकर किया ग्रामीणों का समर्थन

ग्राम सभा की अनदेखी और असंवैधानिक प्रक्रिया को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: अनीता देवी
बालूमाथ/लातेहार।
आज बालूमाथ प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड (NML) को आवंटित ‘नॉर्थ धाधु ईस्टर्न पार्ट कोल माइनिंग प्रोजेक्ट’ के लिए आयोजित की गई जनसुनवाई को ग्रामीणों के भारी और चौतरफा विरोध के कारण जिला प्रशासन को रद्द करना पड़ा। इस अवसर पर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों का नेतृत्व करते हुए लातेहार जिला परिषद उपाध्यक्ष श्रीमती अनीता देवी ने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई।
बैठक में जिले के वरिष्ठ पदाधिकारी, स्थानीय अंचल अधिकारी (CO), प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और एनटीपीसी के उच्च अधिकारी मौजूद थे। जैसे ही जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई, वैसे ही जिला परिषद उपाध्यक्ष श्रीमती अनीता देवी और प्रभावित पंचायतों से आए सैकड़ों ग्रामीणों ने स्थान और प्रक्रिया को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया और नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों के अटूट हौसले और भारी विरोध को देखते हुए अंततः अधिकारियों को आज की जनसुनवाई रद्द करने की घोषणा करनी पड़ी।

इस ऐतिहासिक जीत पर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को बधाई देते हुए जिला परिषद उपाध्यक्ष श्रीमती अनीता देवी ने अपना आधिकारिक वक्तव्य जारी किया. आज की जनसुनवाई का रद्द होना बालूमाथ के जागरूक ग्रामीणों, आदिवासियों और किसानों के अधिकारों की बड़ी जीत है। जिला प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन बंद कमरों और प्रखंड मुख्यालयों में बैठकर ग्रामीणों के भाग्य का फैसला नहीं कर सकते। पेसा कानून (PESA Act) और संविधान की पांचवीं अनुसूची हमें यह अधिकार देती है कि क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन से जुड़ा कोई भी फैसला बिना ‘ग्राम सभा’ की अनुमति के नहीं लिया जा सकता। प्रशासन प्रभावित पंचायतों को छोड़कर दूर मुख्यालय में जनसुनवाई कराकर ग्रामीणों की आवाज दबाना चाहता था, जिसे हमारी एकजुटता ने नाकाम कर दिया।
श्रीमती अनीता देवी ने कंपनी और अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए आगे कहा:
प्रोजेक्ट की पर्यावरण प्रभाव रिपोर्ट (EIA), विस्थापन और पुनर्वास (R&R) नीति और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की शर्तों पर पूरी तरह से अपारदर्शी रुख अपनाया गया है। पूर्व के प्रोजेक्ट्स में विस्थापित हुए लोग आज भी दर-दर भटक रहे हैं, हम बालूमाथ के लोगों के साथ ऐसा अन्याय दोबारा नहीं होने देंगे। हमारी स्पष्ट मांग है कि इस जनसुनवाई को पूरी तरह निरस्त माना जाए और भविष्य में जब भी कोई चर्चा हो, वह किसी सरकारी परिसर में नहीं बल्कि सीधे प्रभावित गांवों की ‘ग्राम सभा’ के बीच पूरी पारदर्शिता के साथ हो।

उन्होंने साफ किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर विनाश और स्थानीय लोगों की आजीविका को उजाड़ना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। एक जनप्रतिनिधि के रूप में वे अंतिम सांस तक ग्रामीणों के जल, जंगल, जमीन और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेंगी।

इस मौके पर प्रभावित क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों के मुखिया, वार्ड सदस्य, ग्राम प्रधान और हजारों की संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी जमीन और भविष्य की रक्षा के लिए इस आंदोलन को सफल बनाया।

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