झरिया अंचल में प्रशासनिक गुंडागर्दी और दलाली राज महीने में सिर्फ 10 दिन आते हैं राम रतन पांडे सर्टिफिकेट के लिए कार्यालय के बाहर रोने को मजबूर हैं छात्र

झरिया अंचल में प्रशासनिक गुंडागर्दी और दलाली राज महीने में सिर्फ 10 दिन आते हैं राम रतन पांडे सर्टिफिकेट के लिए कार्यालय के बाहर रोने को मजबूर हैं छात्र

धनबाद
झरिया अंचल कार्यालय इन दिनों भ्रष्टाचार, प्रशासनिक संवेदनहीनता और एक अधिकारी की तानाशाही का अखाड़ा बन चुका है। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और छात्रों ने झरिया अंचल के राम रतन पांडे पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि वे अपनी मनमर्जी से कार्यालय चलाते हैं और महीने के 30 दिनों में से बमुश्किल 10 दिन ही झरिया आते हैं, जबकि बाकी का पूरा समय हजारीबाग में ऐश करते हैं। अधिकारी की इस मनमर्जी और अड़ियल रवैये के कारण स्थानीय जनता और छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है।

बिना दलाल नो एंट्री आय जाति से लेकर EWS और पारिवारिक सूची तक में अवैध वसूली
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मीडिया को बताया कि राम रतन पांडे बिना दलालों के माध्यम के एक भी काम फ्री में नहीं करते हैं। चाहे छात्रों का आय आवासीय जाति ओबीसी OBC ईडब्ल्यूएस EWS प्रमाण पत्र हो या फिर पारिवारिक सूची Family List हर एक सर्टिफिकेट को आगे बढ़ाने के लिए अंचल में सक्रिय दलालों के जरिए मोटी रकम की मांग की जाती है। जो जनता सीधे काउंटर पर जाती है, उनके आवेदनों में तरह-तरह की कमियां निकालकर उन्हें महीनों दौड़ाया जाता है और आनाकानी की जाती है।
अंचल कार्यालय के बाहर रोने को मजबूर छात्र रोज़ खाली हाथ लौट रहे हैं युवा
इस दलाली प्रथा का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि झरिया अंचल कार्यालय के बाहर हर दिन दर्जनों छात्र-छात्राएं रोते हुए देखे जा सकते हैं। सुदूर गांवों और गरीब परिवारों से आने वाले छात्र जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए रोज़ अंचल कार्यालय के चक्कर काटते हैं। चूंकि उनके पास दलालों को देने के लिए पैसे नहीं होते इसलिए राम रतन पांडे उनके काम में आनाकानी करते हैं। एडमिशन और सरकारी नौकरियों के फॉर्म भरने की अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण ये छात्र डेली अंचल कार्यालय के बाहर रो-रो कर गुहार लगाते हैं लेकिन इस अधिकारी का दिल नहीं पसीजता। आखिरकार ये होनहार युवा रोते हुए खाली हाथ वापस लौट जाते हैं।
केस कर देंगे लाइफ चौपट कर देंगे सवाल पूछने पर मिलती है मुकदमे की धमकी
अंचल कार्यालय में अपनी मर्जी चलाने वाले राम रतन पांडे पर अब आम जनता और शिकायतकर्ताओं को सीधे तौर पर डराने-धमकाने का भी गंभीर आरोप लगा है। जब भी कोई स्थानीय युवा या ग्रामीण उनके काम न करने या अनुपस्थित रहने पर शिकायत दर्ज कराने या सवाल पूछने की कोशिश करता है, तो वे सीधे तौर पर धमकी भरे लहजे में कहते हैं केस कर देंगे और तुम लोगों की लाइफ भविष्य चौपट कर देंगे। इतना ही नहीं मीडिया के सवालों पर भी वे गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हुए कहते हैं कि जिस मीडिया को जो छापना है, छाप ले, मेरा कुछ नहीं होगा।
अंचल अधिकारी CO भी बेबस सहकर्मियों को भी कंप्लेंट की देते हैं धौंस
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा खुद अंचल के भीतर से आ रहा है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि राम रतन पांडे अपने से ऊंचे पद पर बैठे अंचल अधिकारी CO की बात को भी ठेंगा दिखा देते हैं। आखिर झरिया अंचल अधिकारी इन पर इतने मेहरबान क्यों हैं, यह पूरी जनता की समझ से परे है। चर्चा तो यहाँ तक है कि राम रतन पांडे ने अंचल अधिकारी और हल्का के अन्य राजस्व कर्मचारियों को अपने डर और रसूख के साए में दबा रखा है। जब भी कोई कर्मचारी उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाता है, तो राम रतन पांडे उन्हें सीधे धमकी देते हुए कहते हैं ज्यादा कचर-कचर करोगे, तो तुम लोगों की ही शिकायत ऊपर उच्च अधिकारियों से कर के फंसा देंगे।
किस रसूखदार का है हाथ धनबाद उपायुक्त से तत्काल हटाने की मांग
महीने में 20 दिन गायब रहना सवाल पूछने पर जनता को लाइफ चौपट करने की धमकी देना, और अपने ही सहकर्मियों को ब्लैकमेल करना— यह साबित करता है कि राम रतन पांडे के सिर पर रांची या धनबाद में बैठे किसी बेहद रसूखदार अधिकारी या सफेदपोश का वरदहस्त प्राप्त है।
इस घोर प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ अब स्थानीय छात्रों और युवाओं का धैर्य जवाब दे गया है। स्थानीय छात्रों और जनप्रतिनिधियों ने धनबाद उपायुक्त DC से इस पूरे ‘दलाली नेक्सस’ की जांच करने और राम रतन पांडे को तत्काल प्रभाव से यहाँ से हटाने की मांग की है। छात्रों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर राम रतन पांडे को झरिया अंचल से नहीं हटाया गया तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे चक्का जाम करेंगे और संबंधित अधिकारी का पुतला दहन करेंगे।

जोशी न्यूज़ रिपोर्टर मुजाहिद की खास रिपोर्ट

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