विकास योजनाओं पर सख्त मुख्यमंत्री और निरसा का राजनीतिक घमासान

विकास योजनाओं पर सख्त मुख्यमंत्री और निरसा का राजनीतिक घमासान
​झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पथ निर्माण विभाग के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बेहद सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राज्य की सभी सड़कों, पुलों, पुलियाओं, फ्लाईओवरों और अन्य निर्माण परियोजनाओं को तय समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। वर्षों से लंबित पड़े प्रोजेक्ट्स में अनावश्यक देरी और लापरवाही को अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन इन विकास कार्यों के बीच राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां झारखंड सरकार के समर्थक विधायक ही निरसा क्षेत्र में हो रहे कार्यों या फैसलों का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद इनका समर्थन कर रहे हैं। इस विरोधाभास ने जनता के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं और आम लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इस तरह की दोहरी राजनीति के पीछे के असल मायने क्या हैं।
​विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके तहत सभी निर्माणाधीन और पूरी हो चुकी परियोजनाओं का एक अपडेटेड डेटाबेस तैयार किया जाएगा और उनकी जियो-टैगिंग अनिवार्य रूप से की जाएगी। इस व्यवस्था से हर परियोजना की प्रगति, उसकी लागत, गुणवत्ता और समय-सीमा की प्रभावी डिजिटल निगरानी की जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि नियमित मॉनिटरिंग और पारदर्शिता अब विभाग की कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा होगी। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा तेज है कि एक ओर सरकार विकास का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष के भीतर ही आपसी खींचतान और विरोध के सुर देखने को मिल रहे हैं, जिससे आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
​जनता की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने मीडिया और सोशल मीडिया को भी माध्यम बनाया है। सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए सड़कों के गड्ढों, जलजमाव या खराब निर्माण कार्य को लेकर मिलने वाली हर शिकायत पर विभाग को तुरंत एक्शन लेना होगा। वर्तमान में बारिश के मौसम को देखते हुए सड़कों के गड्ढों की मरम्मत, बेहतर जल निकासी की व्यवस्था, सड़कों की गुणवत्ता में सुधार और संकरे रास्तों के चौड़ीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन जनता का यह भी मानना है कि जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत नहीं होगी और आपसी अंतर्विरोध खत्म नहीं होंगे, तब तक जमीनी स्तर पर सुधार लाना मुश्किल होगा।
​राजधानी रांची सहित राज्य के अन्य हिस्सों में सालों से लटके बड़े फ्लाईओवर और मुख्य सड़क प्रोजेक्ट्स को अगले दो महीनों के भीतर हर हाल में पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है। मुख्यमंत्री ने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम पूरा नहीं हुआ, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख और पार्टी के भीतर चल रहे राजनीतिक गतिरोध के बीच राज्य के विकास कार्यों को कितनी गति मिल पाती है।

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