JSFC गोदामों के 200 कामगार मजदूरों की आजीविका बचाने हेतु कांग्रेस नेत्री श्रीमती अनुपमा सिंह ने मिला जोड़ा पोखर आवासीय कार्यालय में।

JSFC गोदामों के 200 कामगार मजदूरों की आजीविका बचाने हेतु कांग्रेस नेत्री श्रीमती अनुपमा सिंह ने मिला जोड़ा पोखर आवासीय कार्यालय में।

श्रीमती अनुपमा सिंह ने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रहलाद जोशी को लिखा पत्र जोड़ापोखर झारखंड राज्य खाद्य निगम (JSFC) के बरमसिया, बाघमारा, कांड्रा एवं सिंदरी गोदामों के लगभग सैकडों कामगार मजदूरों का एक प्रतिनिधिमंडल आज धनबाद की लोकप्रिय कांग्रेस नेत्री श्रीमती अनुपमा सिंह से मिलकर अपनी गंभीर समस्याओं से अवगत कराया।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वे पिछले लगभग 50 वर्षों से, बाघमारा बरमसिया कांड्रा सिंदरी गोदामों में खाद्यान्न की लोडिंग, अनलोडिंग एवं अन्य संबंधित कार्यों के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं। हाल ही में भारत सरकार से प्राप्त दिशा निर्देश के अनुपालन में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से जन वितरण प्रणाली दुकानों तक Direct Door Step Delivery व्यवस्था लागू होने के कारण इन सभी मजदूरों का कार्य लगभग पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे लगभग 200 श्रमिक परिवारों के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। कई परिवारों के सामने भोजन, बच्चों की शिक्षा एवं दैनिक जीवनयापन तक की समस्या खड़ी हो गई है। मामले की गंभीरता एवं मानवीय पक्ष को देखते हुए श्रीमती अनुपमा सिंह ने तत्काल संज्ञान लेते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी जी तथा झारखंड राज्य के संबंधित विभागीय सचिव को पत्र लिखकर इस गंभीर विषय में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।  अपने पत्र में श्रीमती अनुपमा सिंह ने मांग की है कि विगत तीन पुस्तो से लगभग 50 वर्षों से कार्यरत इन मजदूरों की आजीविका सुरक्षित रखने के लिए पूर्व की कार्य व्यवस्था को यथावत बहाल किया जाए अथवा प्रभावित सभी मजदूरों का समुचित समायोजन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी श्रमिक का रोजगार समाप्त न हो और उनके परिवारों के सामने उत्पन्न आजीविका का संकट दूर किया जा सके।

श्रीमती अनुपमा सिंह ने कहा कि जिन श्रमिकों ने दशकों तक खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बेरोजगार कर देना सामाजिक न्याय एवं मानवीय संवेदनाओं के विरुद्ध है। सरकार को विकास और नई व्यवस्थाओं के साथ-साथ श्रमिकों के हितों एवं उनके परिवारों की आजीविका की भी समान रूप से रक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र एवं राज्य सरकार इस अत्यंत संवेदनशील एवं जनहित के मुद्दे पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए प्रभावित लगभग 200 मजदूर परिवारों के हितों की रक्षा हेतु आवश्यक कार्रवाई करेगी।

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