एसआईआर कार्य के दबाव में थमा जनसेवा का पहिया अंचल अधिकारियों ने जताई लाचारी, छात्र-छात्राओं और बेटियों का भविष्य अधर में

एसआईआर कार्य के दबाव में थमा जनसेवा का पहिया अंचल अधिकारियों ने जताई लाचारी, छात्र-छात्राओं और बेटियों का भविष्य अधर में
धनबाद।
झरिया अंचल सहित जिले भर के अंचल कार्यालयों में आय, जाति, आवासीय और ईडब्ल्यूएस जैसे आवश्यक प्रमाण पत्रों के अटकने के पीछे की असली वजह अब खुलकर सामने आ गई है। जब संवाददाताओं ने विभिन्न अंचल अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर प्रमाण पत्रों में हो रही भारी देरी पर जवाब मांगा, तो अधिकारियों ने अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए प्रशासनिक दबाव की बात स्वीकार की।
अंचल अधिकारियों अंचल निरीक्षकों और राजस्व कर्मचारियों का कहना है कि वरिष्ठ स्तर से उन पर एसआईआर का कार्य जल्द से जल्द पूरा करने का अत्यधिक दबाव है। अंचल का लगभग पूरा प्रशासनिक अमला, अधिकारी से लेकर नीचे के कर्मचारी तक, दिन-रात इसी कार्य में व्यस्त हैं। इसके कारण आम जनता, छात्रों और मरीजों से जुड़े दैनिक प्रशासनिक कार्य और प्रमाण पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है।
अधिकारियों का यह तर्क अपनी जगह हो सकता है, परंतु सवाल यह उठता है कि क्या किसी विशेष कार्य के दबाव के नाम पर छात्र-छात्राओं और हमारी बेटियों का भविष्य तथा मरीजों का इलाज दांव पर लगाया जा सकता है नामांकन और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की अंतिम तिथियां सिर पर हैं। तीन तारीख से आवेदन जमा कर चुके अभ्यर्थी चौदह तारीख बीत जाने के बाद भी अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने को विवश हैं। कई बेटियां और छात्र अंचल कार्यालय के बाहर रोते-बिलखते यह गुहार लगा रहे हैं कि यदि समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिले तो उनका एडमिशन छूट जाएगा और जीवन बर्बाद हो जाएगा।
प्रशासनिक प्राथमिकताओं के इस असंतुलन से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले आवेदक मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। धनबाद उपायुक्त को इस स्थिति पर तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। एसआईआर कार्य के साथ-साथ छात्र-छात्राओं, बेटियों व असहाय मरीजों के आवश्यक प्रमाण पत्रों के निष्पादन हेतु वैकल्पिक व्यवस्था या अलग टीम की तैनाती की जानी चाहिए, ताकि जनसेवा का पहिया पूरी तरह से न थमे।

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