सिंदरी में विस्थापितों और कंपनियों के बीच टकराव गहराया, रोड़ाबांध में निर्माण रोकने से उपजा आक्रोश, एफसीआई और केटीएमपीएल के खिलाफ कोर्ट पहुंची विस्थापित समिति

सिंदरी में विस्थापितों और कंपनियों के बीच टकराव गहराया, रोड़ाबांध में निर्माण रोकने से उपजा आक्रोश, एफसीआई और केटीएमपीएल के खिलाफ कोर्ट पहुंची विस्थापित समिति

सिंदरी में विस्थापितों और कंपनियों के बीच टकराव गहराया, रोड़ाबांध में निर्माण रोकने से उपजा आक्रोश, एफसीआई और केटीएमपीएल के खिलाफ कोर्ट पहुंची विस्थापित समित
​सिंदरी और आसपास के क्षेत्रों में अपनी पैतृक जमीन गंवा चुके रैयतों तथा विस्थापितों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। अधिकार और रोजगार न मिलने से आक्रोशित ग्रामीण अब आर पार की लड़ाई के मूड में हैं। गौशाला बाजार ओपी क्षेत्र अंतर्गत रोड़ाबांध मौजा में रैयती जमीन पर मकान निर्माण रोकने की घटना के बाद यह विवाद और अधिक गहरा गया है।
​रोड़ाबांध मौजा में अपने पूर्वजों की वैधानिक जमीन पर मकान का निर्माण करा रहे पीड़ित रैयत विजय सिंह और रामू सिंह के कार्य पर रोक लगा दी गई है। पीड़ितों का आरोप है कि सेल के प्रोजेक्ट केटीएमपीएल और एफसीआई के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे तथा जमीन को एफसीआई की बताकर काम बंद करने का दबाव बनाने लगे।
​पीड़ित रैयतों ने आरोप लगाया है कि कंपनी पक्ष द्वारा जमीन हस्तांतरण से जुड़ा कोई वैध सरकारी दस्तावेज नहीं दिखाया जा रहा है और केवल सादे कागज के शेड्यूल के आधार पर निर्माण रोका जा रहा है। झरिया अंचल अधिकारी के कथित पत्र का हवाला देकर काम ठप कराया गया है, जिससे रैयत अपनी ही जमीन पर निर्माण करने से वंचित हैं। इसके अलावा भू अर्जन कार्यालय और अंचल अधिकारी को दिए गए आवेदनों तथा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी का भी अब तक कोई पारदर्शी जवाब नहीं मिला है।
​इस पूरे घटनाक्रम और बढ़ते विवाद के बीच झारखंड ग्राम विस्थापित युवा समिति मनोहरटांड़ ने फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और केटीएमपीएल प्रबंधन के खिलाफ धनबाद अदालत में इंफॉर्मेटरी पिटीशन दाखिल कर दी है। समिति ने अंदेशा जताया है कि उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए प्रबंधन साम दाम दंड भेद और बाहुबल का सहारा ले सकता है।
​समिति के सचिव जितेंद्र कुमार सिंह ने अधिवक्ता पी के भट्टाचार्य के माध्यम से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा तैंतीस और धारा एक सौ छब्बीस के तहत आवेदन दिया है। अदालत को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार एफसीआई द्वारा विस्थापितों की पैतृक भूमि का अधिग्रहण कर उसे कॉर्पोरेट कार्यों के लिए केटीएमपीएल को सौंप दिया गया, लेकिन मूल विस्थापित परिवारों को न तो रोजगार मिला और ना ही उचित मुआवजा दिया गया।
​समिति का दावा है कि जायज मांगों को दबाने के लिए प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों, बाहुबल या फर्जी मुकदमों का सहारा लिया जा सकता है तथा विस्थापित नेताओं को धमकियां भी दी जा रही हैं। विस्थापित समिति ने स्पष्ट किया है कि वे धरना, प्रदर्शन और जनसभाओं के जरिए लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखेंगे। यदि विस्थापितों या उनके नेताओं के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी एफसीआई और केटीएमपीएल प्रबंधन की होगी। रैयतों और विस्थापितों ने मांग की है कि यदि कंपनियों के पास जमीन हस्तांतरण के वैध कागजात हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा निजी भूमि पर हस्तक्षेप बंद कर विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा की जाए।

 

 

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