दामोदर नदी में डूबी 16 वर्षीय सोनाक्षी की तलाश जारी, 46 घंटे बाद भी NDRF के हाथ खाली, हर साल 50 से अधिक मौतों के बाद भी प्रशासन मौन

दामोदर नदी में डूबी 16 वर्षीय सोनाक्षी की तलाश जारी, 46 घंटे बाद भी NDRF के हाथ खाली, हर साल 50 से अधिक मौतों के बाद भी प्रशासन मौन
धनबाद। के सुदामडीह
सुदामडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत अमलाबाद में जितिया पर्व के स्नान के दौरान दामोदर नदी की तेज धार में बहकर लापता हुई 16 वर्षीय सोनाक्षी कुमारी का 46 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका है। रांची से पहुंची एनडीआरएफ की टीम लगातार सघन रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।
भांजी को बचाने में मामा भी डूबे, लोगों ने बचाई जान
घटना बीते 2 अक्टूबर 2026 की सुबह लगभग 8:30 बजे की है। मूल रूप से बिहार के आरा जिले की रहने वाली सोनाक्षी लोदना स्थित अपने मामा के घर आई हुई थी। जितिया पर्व पर वह अमलाबाद स्थित दामोदर नदी में स्नान करने गई थी, जहां तेज बहाव में बहने लगी। उसे बचाने के लिए मामा अमन ने नदी में छलांग लगाई, लेकिन तेज धार के कारण वे भी डूबने लगे। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए अमन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौके पर डटे
स्थल पर झरिया अंचल के अंचल निरीक्षक राम रतन पांडे, सुदामडीह पुलिस, पार्षद वीरेंद्र कुमार, पार्षद मुनी लाल दास तथा धनबाद सांसद ढुल्लू महतो के प्रतिनिधि गफ्फार अंसारी उर्फ पप्पू स्थानीय लोगों के साथ राहत व बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का दर्द मना करने के बाद भी जोखिम ले रहे लोग
स्थानीय लोगों ने मीडिया से बातचीत में गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि दामोदर नदी में लगातार हादसे हो रहे हैं। आए दिन कोई न कोई डूब रहा है, लेकिन इसके बावजूद लोग सतर्कता बरतने को तैयार नहीं हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालु और आम लोग नदी की गहराई व तेज बहाव को समझे बिना उतर जाते हैं, जिससे हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हर साल दामोदर नदी में डूबने से 50 से अधिक अप्रिय घटनाएं घट रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और परेशानी का माहौल रहता है।
पत्रकार नरेंद्र जोशी के तीखे सवाल: कुंभकर्णी नींद में क्यों सोया है जिला प्रशासन
मामले पर वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र जोशी ने जिला प्रशासन की कार्यशैली और उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि दामोदर नदी में हर साल 50 से अधिक पुरुषों, महिलाओं और मासूम बच्चों की जान जा रही है, लेकिन इसके बावजूद जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। धनबाद उपायुक्त की नींद आखिर कब खुलेगी? जब हर साल इतनी जानें जा रही हैं, तो प्रशासन यहां दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में घेराबंदी क्यों नहीं कराता खतरनाक घाटों पर जाने से रोकने के लिए कोई जागरूकता अभियान या सुरक्षा बल तैनात क्यों नहीं किए जाते लगातार हो रही मौतें प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता प्रमाण हैं।

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