झरिया अंचल में दबंग सीआई का राज: तीन दिन और बीतने के बाद भी छात्रों के प्रमाण पत्र रोके, कुंभकर्णी नींद में सोया धनबाद जिला प्रशासन और गूंज रहा है एक ही नारा—झरिया अंचल से राम रतन पांडे को हटाओ, कामचोरों को जड़ से उखाड़ो

धनबाद जिले के झरिया अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार, तानाशाही और प्रशासनिक अराजकता का ऐसा नंगा नाच चल रहा है कि यहाँ के अधिकारी अब देश के कानून, राज्य शासन और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को भी पूरी तरह ठेंगा दिखाने लगे हैं। लगातार समाचार पत्रों और मीडिया में खबरें प्रकाशित होने, सीपीजीआरएएमएस तथा उच्च कार्यालयों में बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद अंचल निरीक्षक यानी सीआई राम रतन पांडे को झरिया अंचल से क्यों नहीं हटाया जा रहा है, यह स्थिति पूरे धनबाद जिला प्रशासन की कार्यशैली पर अत्यंत गंभीर और शर्मनाक सवाल खड़े कर रही है। पिछले कई दिनों से लगातार चेतावनियां देने और मीडिया में पोल खुलने के बावजूद, आज तीन दिन और बीत जाने के बाद भी दबंग सीआई राम रतन पांडे द्वारा गरीब छात्र-छात्राओं के आय, आवासीय और जाति प्रमाण पत्रों को लगातार रोका जा रहा है, और धनबाद के उपायुक्त तथा झरिया अंचल अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। जनता और पीड़ित छात्रों के बीच अब बस एक ही गूंज उठ रही है कि झरिया अंचल से राम रतन पांडे को हटाओ, कामचोरों को जड़ से उखाड़ो और झरिया अंचल को भ्रष्टाचार से बचाओ।

​पीड़ित जोशी नरेन्द्र भाई किशोर भाई, जो न केवल एक पीड़ित आवेदक हैं बल्कि एक जिम्मेदार मीडिया संचालक भी हैं, जब उन्होंने महीनों बीतने और बार-बार रिमाइंडर देने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर सीआई राम रतन पांडे से जवाब मांगा, तो सीआई साहब ने सारे प्रशासनिक शिष्टाचार और कानून की धज्जियां उड़ा दीं। सीआई राम रतन पांडे ने अत्यंत अहंकार और दबंगई भरे लहजे में मीडिया संचालक को सीधे धमकी देते हुए कहा कि जो छापना है छाप लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगड़ने वाला, और यदि ज्यादा सवाल-जवाब करोगे तो तुमको भी किसी ना किसी झूठे केस में फंसा देंगे। एक मीडिया संचालक को सरकारी कार्यालय में इस प्रकार खुलेआम किसी झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देना यह साबित करता है कि झरिया अंचल कार्यालय में किस कदर प्रशासनिक गुंडागर्दी और तानाशाही का साम्राज्य स्थापित हो चुका है।

​यहाँ यह बात स्पष्ट रूप से रेखांकित करने योग्य है कि जोशी नरेन्द्र भाई यह लड़ाई केवल अपने निजी स्वार्थ या व्यक्तिगत मामले के लिए नहीं लड़ रहे हैं। झरिया अंचल के अनेक पीड़ित छात्रों और आम नागरिकों ने अंचल कार्यालय की मनमानी से तंग आकर बार-बार उनसे शिकायत और गुहार लगाई थी। पीड़ित छात्रों की इसी आवाज को बुलंद करने और उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से ही मीडिया संचालक जोशी नरेन्द्र भाई ने अपने स्तर पर संज्ञान लेते हुए पीएमओ पोर्टल और उच्च कार्यालयों में लिखित शिकायतें दर्ज कराई थीं।

​झरिया अंचल कार्यालय में धांधली का खेल केवल शिकायतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों और छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा हर सरकारी काम यहाँ दलाली और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। आय प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र से लेकर दाखिल-खारिज और म्यूटेशन जैसे अंचल के सभी महत्वपूर्ण कार्यों में सीआई राम रतन पांडे जानबूझकर आवेदनों और कागजातों को अटकाकर रखते हैं। आवेदनों को महीनों तक जानबूझकर लटकाए रखने के बाद सीआई साहब अंत में रिपोर्ट में लिखकर भेज देते हैं कि तत्काल प्रस्तुत कागजात एक्सपायर या अमान्य हैं। इसके आधार पर अंचलाधिकारी स्तर से आवेदनों को निरस्त कर दिया जाता है। इस भ्रष्ट और शातिराना खेल के कारण गरीब छात्र-छात्राएं और आम लोग अंचल कार्यालय के चक्कर काट-काटकर पूरी तरह परेशान और हताश हो चुके हैं, जिससे कई युवाओं का दाखिला और नौकरियों के आवेदन तक छूट रहे हैं। ताजा खबरें छपने और तीन दिन का अतिरिक्त समय बीत जाने के बाद भी सीआई राम रतन पांडे की सुई वहीं अटकी हुई है और वे छात्रों के प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहे हैं।

​यह पूरा मामला जोशी नरेन्द्र भाई किशोर भाई की दो-दो अति-महत्वपूर्ण लंबित शिकायतों से जुड़ा हुआ है, जिसमें पहली मूल शिकायत संख्या PMOPG E 2026 0114421 बीते 26.06.2026 से यानी लगभग चार महीने से अधिक समय से अंचल कार्यालय में धूल फांक रही है, वहीं दूसरी मूल शिकायत संख्या PMOPG E 2026 0143896 बीते 03.08.2026 से ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी जन-शिकायत का समाधान 21 से 30 दिनों के भीतर होना अनिवार्य है, लेकिन धनबाद जिला प्रशासन और झरिया अंचल के अधिकारियों के लिए ये नियम सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। पीड़ित मीडिया संचालक द्वारा लगातार स्मरण पत्र भेजे जा चुके हैं, इसके बावजूद नतीजा आज भी शून्य है और अंचल निरीक्षक द्वारा कोई जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई है।

​सबसे बड़ा और गंभीर प्रश्न यह उठता है कि आय, आवासीय, जाति और म्यूटेशन में खुलेआम कमीशनखोरी और मनमानी करने, लगातार मीडिया में खबरें आने और उच्च स्तर पर शिकायतें दर्ज होने के बाद भी सीआई राम रतन पांडे झरिया अंचल से हटाए क्यों नहीं जा रहे हैं। आखिर किस बड़े अधिकारी या सफेदपोश का वरदहस्त उनके सिर पर है, जिसके दम पर वे इतनी बड़ी मनमानी कर रहे हैं और एक मीडिया संचालक को सच उजागर करने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। क्या धनबाद के उपायुक्त और झरिया अंचल अधिकारी जानबूझकर इस भ्रष्ट रवैये पर पर्दा डाल रहे हैं और किसी बड़ी प्रशासनिक अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं।

​किसी मीडिया संचालक को जनहित और छात्रों का मुद्दा उठाने पर केस में फंसाने की धमकी देना तथा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। अब जनता की एक ही मांग है कि झरिया अंचल से राम रतन पांडे को हटाओ, कामचोरों को जड़ से उखाड़ो और झरिया अंचल को भ्रष्टाचार से बचाओ। यदि धनबाद जिला प्रशासन इस बेलगाम अधिकारी को तत्काल प्रभाव से अंचल से हटाकर निलंबित नहीं करता है और उनके खिलाफ विभागीय तथा आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं करता है, तो यह माना जाएगा कि इस पूरी धांधली और धमकी में जिला प्रशासन की भी मौन सहमति है। इस प्रशासनिक तानाशाही और खुली गुंडागर्दी के खिलाफ अब झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने और मुख्यमंत्री कार्यालय तथा महामहिम राष्ट्रपति तक इस भ्रष्टाचार की फाइल पहुँचाने की पूरी तैयारी की जा रही है।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now

जवाब जरूर दे 

[poll]

Related Articles

Back to top button
Close
Website Design By Mytesta.com +91 8809666000