मोहन बाजार में रावण दहन के नाम पर प्रशासन की खुली पोल: मूकदर्शक बनी सुदामडीह पुलिस, जाम में फंसे सांसद-विधायक तब जागे डीएसपी

मोहन बाजार में रावण दहन के नाम पर प्रशासन की खुली पोल: मूकदर्शक बनी सुदामडीह पुलिस, जाम में फंसे सांसद-विधायक तब जागे डीएसपी

मोहन बाजार
बीते गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 की शाम लगभग 7:00 बजे मोहन बाजार में विजयादशमी के पावन अवसर पर रावण दहन का भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह आयोजन एक तरफ जहां बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बना, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पुलिस-प्रशासन की लचर व्यवस्था ने इस शानदार आयोजन को प्रशासनिक नाकामी की भेंट चढ़ा दिया। हजारों की भीड़ और सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ते हुए पूरे इलाके में घंटों जाम का झंझावत जारी रहा, लेकिन पुलिस महकमा तमाशबीन बना रहा।
कार्यक्रम के दौरान रावण के चरित्र के विराट और विद्वत स्वरूप की चर्चा हुई। रावण चारों वेदों और छः शास्त्रों का प्रकांड विद्वान, महान शिवभक्त और ज्योतिष व वास्तु शास्त्र का अद्वितीय मर्मज्ञ था। उसकी सबसे बड़ी सोच और चाहत यह थी कि उसके राज्य में किसी भी माता-पिता के रहते उनके पुत्र या पुत्री का देहांत न हो और कोई भी प्राणी अकाल मृत्यु का शिकार न बने। इसके साथ ही स्वर्ग तक सीढ़ी का निर्माण करना, समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाना, सोने में सुगंध भरना और मदिरा को गंधहीन करना उसका सपना था, ताकि संसार से दुखों का अंत हो सके। परंतु इतने महान ज्ञान, विचार और सामर्थ्य के बावजूद उसके भयंकर अहंकार और अधर्म ने उसके संपूर्ण कुल का नाश कर दिया।
दुर्भाग्य से, यही सुस्ती और प्रशासनिक अहंकार इस आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे पुलिस अधिकारियों के रवैये में भी झलका। आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंच पर धनबाद के वर्तमान महापौर श्री संजीव सिंह, झरिया विधायक श्रीमती रागिनी सिंह, धनबाद सांसद श्री ढुल्लू महतो, पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह और आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रभास अग्रवाल जैसे तमाम दिग्गज मौजूद थे। गुरुवार की शाम उमड़े इस भारी जनसैलाब को देखकर यह साफ था कि हजारों की भीड़ होगी, इसके बावजूद पुलिस ने डीनोबली मोड़ से सिंदरी तक 3 किलोमीटर के दायरे में फोर-व्हीलर वाहनों के लिए नो-एंट्री या ट्रैफिक डायवर्जन का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया।
नतीजा यह हुआ कि सुदामडीह थाना प्रभारी महोदय अपनी जिम्मेदारी भूलकर केवल मूकदर्शक की भूमिका में हाथ पर हाथ धरे खड़े नजर आए। आलम यह रहा कि झरिया विधायक श्रीमती रागिनी सिंह तक को कार्यक्रम में आने-जाने के लिए भारी फजीहत झेलनी पड़ी। हद तो तब पार हो गई जब धनबाद सांसद श्री ढुल्लू महतो का काफिला भी इसी अराजक ट्रैफिक जाम में बुरी तरह फंस गया।
जब वीआईपी और आम जनता का सड़कों पर दम घुटने लगा, तब जाकर प्रशासनिक नींद टूटी और सिंदरी डीएसपी को खुद सड़क पर उतरकर मोर्चा संभालना पड़ा। डीएसपी की व्यक्तिगत मशक्कत के बाद किसी तरह यातायात सुचारू हो पाया। अब सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन को पहले से पता था कि मोहन बाजार में महाआयोजन होना है, तो फिर सुदामडीह पुलिस ने पहले से कमर क्यों नहीं कसी क्या पुलिस किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही थी स्थानीय जनता और प्रबुद्ध नागरिकों में पुलिस-प्रशासन के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है।

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