झरिया अंचल में दबंग सीआई का राज: मीडिया संचालक को केस में फंसाने की धमकी

झरिया अंचल में दबंग सीआई का राज: मीडिया संचालक को केस में फंसाने की धमकी

​धनबाद जिले के झरिया अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार, तानाशाही और प्रशासनिक अराजकता का ऐसा नंगा नाच चल रहा है कि यहाँ के अधिकारी अब देश के कानून, राज्य शासन और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को भी पूरी तरह ठेंगा दिखाने लगे हैं। महीनों से समाचार पत्रों में लगातार खबरें प्रकाशित होने और पीएमओ संचालित CPGRAMS पोर्टल पर बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद अंचल निरीक्षक यानी सीआई राम रतन पांडे को झरिया अंचल से क्यों नहीं हटाया जा रहा है, यह स्थिति पूरे धनबाद जिला प्रशासन की कार्यशैली पर अत्यंत गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

​पीड़ित जोशी नरेन्द्र भाई किशोर भाई, जो न केवल एक पीड़ित आवेदक हैं बल्कि एक जिम्मेदार मीडिया संचालक भी हैं, जब उन्होंने चार महीने से अधिक समय बीतने और बार-बार रिमाइंडर देने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर सीआई राम रतन पांडे से जवाब मांगा, तो सीआई साहब ने सारे प्रशासनिक शिष्टाचार और कानून की धज्जियां उड़ा दीं। सीआई राम रतन पांडे ने अत्यंत अहंकार और दबंगई भरे लहजे में मीडिया संचालक को सीधे धमकी देते हुए कहा कि जो छापना है छाप लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, और यदि ज्यादा सवाल-जवाब करोगे तो तुमको भी किसी न किसी झूठे केस में फंसा देंगे। एक मीडिया संचालक को सरकारी कार्यालय में इस प्रकार खुलेआम किसी झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देना यह साबित करता है कि झरिया अंचल कार्यालय में किस कदर प्रशासनिक गुंडागर्दी और तानाशाही का साम्राज्य स्थापित हो चुका है।

​यहाँ यह बात स्पष्ट रूप से रेखांकित करने योग्य है कि जोशी नरेन्द्र भाई यह लड़ाई केवल अपने निजी स्वार्थ या व्यक्तिगत मामले के लिए नहीं लड़ रहे हैं। झरिया अंचल के अनेक पीड़ित छात्रों और आम नागरिकों ने अंचल कार्यालय की मनमानी से तंग आकर बार-बार उनसे शिकायत और गुहार लगाई थी। पीड़ित छात्रों की इसी आवाज को बुलंद करने और उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से ही मीडिया संचालक जोशी नरेन्द्र भाई ने अपने स्तर पर संज्ञान लेते हुए पीएमओ पोर्टल पर लिखित शिकायतें दर्ज कराई थीं।

​झरिया अंचल कार्यालय में धांधली का खेल केवल शिकायतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों और छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा हर सरकारी काम यहाँ दलाली और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। आय प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र से लेकर दाखिल-खारिज और म्यूटेशन जैसे अंचल के सभी महत्वपूर्ण कार्यों में सीआई राम रतन पांडे जानबूझकर आवेदनों और कागजातों को अटकाकर रखते हैं। आवेदनों को महीनों तक जानबूझकर लटकाए रखने के बाद सीआई साहब अंत में रिपोर्ट में लिखकर भेज देते हैं कि ‘तत्काल प्रस्तुत कागजात एक्सपायर या अमान्य हैं’। इसके आधार पर अंचलाधिकारी (सीओ) स्तर से आवेदनों को निरस्त कर दिया जाता है। इस भ्रष्ट और शातिराना खेल के कारण गरीब छात्र-छात्राएं और आम लोग अंचल कार्यालय के चक्कर काट-काटकर पूरी तरह परेशान और हताश हो चुके हैं, जिससे कई युवाओं का दाखिला और नौकरियों के आवेदन तक छूट रहे हैं।

​यह पूरा मामला जोशी नरेन्द्र भाई किशोर भाई की दो-दो अति-महत्वपूर्ण लंबित शिकायतों से जुड़ा हुआ है, जिसमें पहली मूल शिकायत संख्या PMOPG E 2026 0114421 बीते 26.06.2026 से यानी लगभग चार महीने और 118 दिनों से अंचल कार्यालय में धूल फांक रही है, वहीं दूसरी मूल शिकायत संख्या PMOPG E 2026 0143896 बीते 03.08.2026 से यानी 80 दिनों से ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। केंद्र सरकार के CPGRAMS नियमों के अनुसार किसी भी जन-शिकायत का समाधान 21 से 30 दिनों के भीतर होना अनिवार्य है, लेकिन धनबाद जिला प्रशासन और झरिया अंचल के अधिकारियों के लिए ये नियम सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। पीड़ित मीडिया संचालक द्वारा 25 अगस्त, 30 सितंबर, 8 अक्टूबर, 13 अक्टूबर और आज 22 अक्टूबर 2026 तक लगातार पाँच-पाँच बार स्मरण पत्र यानी रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं, इसके बावजूद नतीजा आज भी शून्य है और अंचल निरीक्षक द्वारा कोई जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई है।

​सबसे बड़ा और गंभीर प्रश्न यह उठता है कि आय, आवासीय, जाति और म्यूटेशन में खुलेआम कमीशनखोरी और मनमानी करने, महीनों से मीडिया में खबरें आने और पीएमओ पोर्टल पर शिकायतें दर्ज होने के बाद भी सीआई राम रतन पांडे झरिया अंचल से हटाए क्यों नहीं जा रहे हैं। आखिर किस बड़े अधिकारी या सफेदपोश का वरदहस्त उनके सिर पर है, जिसके दम पर वे इतनी बड़ी मनमानी कर रहे हैं और एक मीडिया संचालक को सच उजागर करने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। क्या धनबाद के उपायुक्त (DC) और जिले के शीर्ष अधिकारी जानबूझकर इस भ्रष्ट रवैये पर पर्दा डाल रहे हैं।

​किसी मीडिया संचालक को जनहित और छात्रों का मुद्दा उठाने पर केस में फंसाने की धमकी देना तथा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। यदि धनबाद जिला प्रशासन इस बेलगाम अधिकारी को तत्काल प्रभाव से अंचल से हटाकर निलंबित नहीं करता है और उनके खिलाफ विभागीय तथा आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं करता है, तो यह माना जाएगा कि इस पूरी धांधली और धमकी में जिला प्रशासन की भी मौन सहमति है। इस प्रशासनिक तानाशाही और खुली गुंडागर्दी के खिलाफ अब झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष मामला ले जाने की पूरी तैयारी की जा रही है।

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