कागजी जांच और हकीकत का पर्दाफाश सिंदरी के डोमगढ़ में प्रदूषण विभाग की क्लीन चिट झूठी, खुलेआम जंगल-झाड़ जलाकर नाली से बहाया जा रहा है जहरीला मोबिल

कागजी जांच और हकीकत का पर्दाफाश सिंदरी के डोमगढ़ में प्रदूषण विभाग की क्लीन चिट झूठी, खुलेआम जंगल-झाड़ जलाकर नाली से बहाया जा रहा है जहरीला मोबिल

​सिंदरी के डोमगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया में विमल अग्रवाल के मोबिल रिफाइनिंग प्लांट के काले कारनामों को लेकर प्रदूषण विभाग और तथाकथित जांच टीमों की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्लांट मालिक और जांच एजेंसियां भले ही यह दावा करती फिर रही हैं कि सब कुछ ठीक है और उनकी जांच में कोई कमी नहीं पाई गई है, लेकिन जमीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट और बेहद डरावनी है। सच्चाई यह है कि प्लांट के भीतर और आसपास न सिर्फ भारी प्रदूषण फैलाया जा रहा है, बल्कि आज भी खुलेआम जंगल-झाड़ और कचरे को जलाया जा रहा है, जिससे उठने वाला काला और जहरीला धुआं पूरे इलाके को गैस चैंबर बना रहा है।
​तस्वीरों और मौके के हालातों से यह साफ जाहिर हो रहा है कि प्लांट संचालक किस तरह नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्लांट के अंदर से निकलने वाला खतरनाक और बेकार मोबिल अपशिष्ट तेल सीधे नालियों के माध्यम से बाहर खुले में बहाया जा रहा है। यह जहरीला मोबिल नाली से बहते हुए पर्यावरण और आसपास की मिट्टी को पूरी तरह बर्बाद कर रहा है, जिसकी तस्वीरें इस बात का पुख्ता सबूत दे रही हैं कि प्रदूषण विभाग की जांच रिपोर्ट कितनी झूठी और लीपापोती से भरी हुई है।
​हैरानी की बात यह है कि इस जानलेवा लापरवाही और अवैध डंपिंग के खिलाफ स्थानीय लोगों द्वारा झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत दर्ज कराए हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दो दिन बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन कुंभकर्ण की गहरी नींद में सोया हुआ है। विभाग की तरफ से आने वाली जांच टीमें या तो कागजों पर सब कुछ हरा-भरा दिखा कर चली जाती हैं, या फिर फर्जी रिपोर्ट थमाकर जनता की आंखों में धूल झोंक रही हैं।
​मेडिकल साइंस और डॉक्टरी रिपोर्ट्स के अनुसार, पुराने मोबिल के जलने और उसके कचरे से उठने वाले सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और जहरीले हाइड्रोकार्बन हवा में घुलकर इंसान के फेफड़ों को अंदर से गला रहे हैं। इस दूषित वातावरण और नाली में बह रहे केमिकल के कारण सांस लेने में भारी दिक्कत, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा का अटैक, आंखों में तेज जलन, त्वचा के भयानक संक्रमण और तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर जैसी जानलेवा बीमारियां फैल रही हैं।
​प्रदूषण विभाग की फर्जी क्लीन चिट और प्लांट मालिक विमल अग्रवाल की मनमानी से डोमगढ़ की जनता और राहगीरों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। जैसा कि तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह नाली से जहरीला मोबिल निकाला जा रहा है और जंगलों में आग लगाई जा रही है, इसके बाद भी यदि प्रशासन नहीं चेता, तो जनता सड़कों पर उतरकर एक उग्र और बड़ा आंदोलन करने के लिए विवश होगी, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन और प्लांट प्रबंधन की होगी।
​संवाददाता – जोशी न्यूज़ 24

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