सिंदरी में भ्रष्टाचार का पुल: गौशाला बाजार के नूतनडीह बस्ती से कांड्रा मार्ग पर घटिया मिट्टी-बालू का खेल, जनता की चुप्पी पर पैसों और धमकियों का पहरा!

सिंदरी में भ्रष्टाचार का पुल: गौशाला बाजार के नूतनडीह बस्ती से कांड्रा मार्ग पर घटिया मिट्टी-बालू का खेल, जनता की चुप्पी पर पैसों और धमकियों का पहरा!

सिंदरी में भ्रष्टाचार का पुल और बिजली विभाग की खुली लूट: गौशाला बाजार के नूतनडीह मार्ग पर घटिया निर्माण के साथ चल रहा अवैध बिजली चोरी का काला खेल, जनता त्रस्त और प्रशासन मौन!
धनबाद/सिंदरी:
झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं सेतु योजना के नाम पर धनबाद जिले में किस तरह लूट मची हुई है, इसकी बानगी सिंदरी क्षेत्र के गौशाला बाजार के नूतनडीह बस्ती से होते हुए कांड्रा बस्ती तक चल रहे निर्माण कार्य से साफ देखी जा सकती है। जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से बनने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर नियमों और मानकों को ताक पर रखकर सरेआम घटिया खेल खेला जा रहा है, जिसमें अब बिजली विभाग की संलिप्तता और भारी भ्रष्टाचार का एक और बड़ा मामला सामने आया है।
मंगलवार को ‘जोशी न्यूज़’ की टीम ने जब इस निर्माण स्थल का धरातलीय निरीक्षण किया, तो वहां का सच बेहद चौंकाने वाला मिला। पुल का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने की कगार पर है और थोड़ा-बहुत काम ही बाकी बचा है, लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट में मजबूत सामग्री की जगह बेहद घटिया मिट्टी और झुकता हुआ मिट्टीयुक्त बालू धड़ल्ले से खपाया जा रहा है। मौके पर मौजूद सुपरवाइजर ने खुद इस बात की तस्दीक की है कि यह पूरा घटिया निर्माण कार्य बोकारो के ठेकेदार संजय कुमार सिंह की एजेंसी ‘जय माता दी’ द्वारा कराया जा रहा है। नियमानुसार किसी भी सड़क या पुल के निर्माण में उच्च कोटि की मजबूत भराव मिट्टी और मानक नदी का कोर्स सैंड इस्तेमाल होना चाहिए, ताकि ढांचा भारी वाहनों का दबाव झेल सके, लेकिन यहां खुलेआम भ्रष्टाचार की नींव रखी जा रही है।
इस भ्रष्टाचार के बीच निर्माण स्थल पर बिजली विभाग की मिलीभगत से चल रहे अवैध खेल ने सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि वहां बिजली का मीटर तो लगा हुआ है, लेकिन उसके कनेक्शन को हटाकर या दरकिनार कर दिन-रात बाहर बड़े-बड़े एलईडी बल्ब और व्यावसायिक कार्यों (अंडे का कारोबार व अन्य गतिविधियों) के लिए धड़ल्ले से अवैध बिजली चोरी की जा रही है। हैरानी और क्षोभ का विषय यह है कि यदि किसी गरीब मजदूर या आम आदमी के घर में थोड़ा सा भी विवाद हो या मीटर में मामूली गड़बड़ी मिल जाए, तो बिजली विभाग की टीम तुरंत छापा मारने पहुंच जाती है और जुर्माना या जेल का डर दिखाकर गरीबों का शोषण करती है, लेकिन इस बड़े ठेकेदार और उसके कारिंदों द्वारा खुलेआम की जा रही बिजली चोरी पर विभाग की आंखें क्यों बंद हैं? इससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की पूरी मिलीभगत है और इस अवैध बिजली के इस्तेमाल के एवज में मोटी अवैध वसूली (घूसखोरी) का खेल चल रहा है।
इस पूरे खेल का एक और सबसे डरावना पहलू स्थानीय ग्रामीणों की खामोशी है। जब इस निर्माण कार्य की शुरुआत हुई थी, तब गौशाला बाजार के नूतनडीह बस्ती और आसपास के लोगों ने इसके खिलाफ जोरदार मोर्चा खोला था और दो टूक चेतावनी दी थी कि यहां घटिया बालू और मिट्टी का खेल नहीं चलने दिया जाएगा। लेकिन देखते ही देखते ग्रामीणों के वे तेवर अचानक गायब हो गए और सबने रहस्यमय तरीके से चुप्पी साध ली। सूत्रों और दबी जुबान से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, जनता की इस खामोशी के पीछे या तो ठेकेदार के कारिंदों द्वारा बड़ा पैसों का खेल खेला गया है या फिर गरीब और बेबस ग्रामीणों को डरा-धमकाकर चुप करा दिया गया है, जिसका पूरा फायदा उठाकर ठेकेदार बेखौफ होकर घटिया निर्माण और अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।
हैरानी की बात है कि जनता के हक और सरकारी संसाधनों पर डाका डालने वाले इस नापाक खेल के बावजूद धनबाद के तमाम जिम्मेदार प्रशासनिक और बिजली विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। जनता और मीडिया अब सीधे तौर पर धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन, उप विकास आयुक्त सन्नी राज, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता बेनीलाल मरांडी तथा बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर उनकी नाक के नीचे यह अवैध बिजली चोरी और घटिया निर्माण का खेल कैसे चल रहा है। ‘जोशी न्यूज़’ की दो टूक मांग है कि निर्माण स्थल से मिट्टी और बालू के सैंपल ज़ब्त कर तत्काल लैब जांच कराई जाए, अवैध बिजली चोरी को लेकर संबंधित ठेकेदार और बिजली विभाग के भ्रष्ट कर्मियों पर तुरंत छापा मारकर कानूनी कार्रवाई हो, और ग्रामीणों को दबाने वाले नेक्सस की उच्चस्तरीय जांच की जाए ताकि जनता की गाढ़ी कमाई और अधिकारों की रक्षा हो सके।

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