बांस की टूटी झोपड़ी से 60 लाख के गहने रिकवर, अब टारगेट पर कोढ़ा गैंग*

*बांस की टूटी झोपड़ी से 60 लाख के गहने रिकवर, अब टारगेट पर कोढ़ा गैंग*

राँची : निलय प्रकाश और उनकी पत्नी बीते 8 दिसंबर को रोज की तरह नहीं, बल्कि थोड़ी संतोष भरी मुस्कान के साथ घर लौट रहे थे। बैंक ऑफ इंडिया, बरियातु शाखा से उन्होंने अपने लॉकर में रखे जेवर निकाल लिये थे। लंबे समय से ये जेवर त्योहार और परिवारिक कामों के लिए घर लाने का प्लान बन रहा था। दोनों को क्या पता था कि घर की दहलीज तक पहुंचते-पहुंचते उनकी दुनिया अचानक उलट जाएगी। कार से उतरकर निलय की पत्नी ने जैसे ही गेट खोला, पीछे से तेज आवाज और हवा के झोंके की तरह एक बाइक पर सवार दो उचक्के पहुंचे और पल भर में उनके कंधे का बैग गायब। सोना, चांदी, यादें, उम्मीदें… सब किसी और की मुट्ठी में। उस पल की चीख और घबराहट निलय शायद कभी नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने खुद को संभाला और तुरंत सदर थाना पहुंच गये। सामने बैठे मिले थानेदार इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार। तुरंत प्राथमिकी दर्ज की गयी।

इंस्पेक्टर कुलदीप को मिली थी कमान
राजधानी में हाल के दिनों में बढ़ती छिनतई की वारदातों को लेकर पुलिस कप्तान राकेश रंजन पहले से ही सख्त थे। लेकिन निलय दंपति की घटना ने उनका माथा ठनका दिया। घर के गेट पर लूट… यह सिर्फ अपराध नहीं, किसी परिवार की सुरक्षा भावना पर हमला था। एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर सिटी एसपी पारस राणा ने सदर डीएसपी संजीव बेसरा की अगुवाई में एक SIT गठित की। टीम की कमान सौंपी गयी थानेदार कुलदीप कुमार को। कुलदीप कुमार उन अफसरों में हैं जिनके लिए हर केस कानून की किताब नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी की तरह होता है। टीम की कमान मिलते ही वे सीधे निलय से मिले। घटना स्थल देखा, हर सेकंड को परखा और साफ कहा… “ये जेवर हम वापस लाकर ही दम लेंगे।”

बैंक में ही की गयी थी रेकी, पीछे लग गये थे उचक्के
जब बाकी लोग फुटेज और कॉल रिकॉर्ड में उलझे थे, कुलदीप कुमार ने तेजी से पैटर्न पहचान लिया। उनकी नजर एक पुराने गिरोह पर गई… कोढ़ा गैंग। रांची-बिहार सीमा पर एक्टिव यह गैंग झपट्टामारी में कुख्यात है। इंस्पेक्टर कुलदीप ने तुरंत समझ लिया कि केस का सिरा रांची में नहीं, बल्कि कटिहार में मिलेगा। इसी बीच उन्होंने यह भी जाना कि निलय प्रकाश और उनकी पत्नी की रेकी बैंक की भीतर ही की गयी थी। जिस वक्त निलय बैंक के लॉकर से जेवरात निकाल रहे थे, उसी वक्त उचक्कों ने उन्हें देखा और आगे की प्लानिंग कर डाली। वे उचक्के बैंक से नियल की कार के पीछे लग गये। साथ ही फोन पर किसी से बात करते रहे। वे लोग अपने साथियों को आगे की प्लानिंग बता रहे थे। जैसे ही निलय की कार घर के बाहर खड़ी हुई, पीछा कर रहे बदमाश भी कुछ दूर पर रुक गये। जब निलय की पत्नी दरवाजा के पास पहुंची को एक दूसरी बाइक पर सवार दो लोगों ने गहनों से भरा बैग झपटा और फुर्र हो गये। इधर, कार का पीछा करने वाले बाइक सवार भी फरार हो चुके थे।

 

सर्त रात में कटिहार की ओर बढ़ी टीम
यह सिर्फ एक छिनतई का केस नहीं था, यह वह चुनौती थी जिसमें रांची पुलिस की तेज और भरोसेमंद छवि दाव पर थी। थानेदार कुलदीप कुमार ने रात में ही टीम तैयार की। तकनीकी शाखा के विवेक कुमार और आरक्षी प्रभांशु कुमार को लेकर वे कटिहार के लिए रवाना हुए। यात्रा आसान नहीं थी। सर्द रात, अनजान इलाका और एक गैंग, जिसकी दहशत स्थानीय लोग भी बयां करते हैं। लेकिन कुलदीप का आत्मविश्वास पूरी टीम का सहारा था।

बांस से बनी झोपड़ी में रखे फटे बैग में मिले सारे जेवरात
कटिहार पुलिस की मदद से जुराबगंज गांव में दबिश दी गई। तंग गलियां, कच्चे-पक्के रास्ते और अंदर ही अंदर फैली उस गैंग की दहशत, जिसे पुलिस तलाश रही थी। स्थानीय थाना की मदद से टीम ने रामकुमार यादव के घर पर छापेमारी शुरू की। कुलदीप खुद आगे थे। गांव के एक पुराने बांस से बने घर (झोपड़ी) में पड़े एक फटे हुए बैग पर उनकी नजर रुकी। बैग खुला और अंदर जो दिखाई दिया, उसने पूरी टीम के चेहरे पर रोशनी ला दी। 425 ग्राम सोना और 450 ग्राम चांदी, गिन्नियां, बिस्कुट, चेन, अंगूठियां, झुमके… सब कुछ। एक भी गहना गायब नहीं। बरामद गहनों की कीमत करीब 55-60 लाख रुपये आंकी गयी। इंस्पेक्टर कुलदीप की टीम सारे गहने लेकर वापस लौट आई और अब उन उचक्कों की तलाश में जुट गयी, जिन्होंने इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया था। सिटी एसपी पारस राणा ने दावा किया है कि बदमाश जल्द ही टीम के शिकंजे में होंगे। क्या बोल गये सिटी एसपी पारस राणा…

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