खुली चुनौती अंचलों की फाइलों का खुलेआम हो ऑडिट साल भर का पेंडिंग कचरा खोल देगा निगम के भ्रष्टाचार की पोल

खुली चुनौती अंचलों की फाइलों का खुलेआम हो ऑडिट साल भर का पेंडिंग कचरा खोल देगा निगम के भ्रष्टाचार की पोल

धनबाद नगर निगम के अंचलों में भ्रष्टाचार का पेंडिंग खेल फाइलों के अंबार में दफन हुआ सेवा का अधिकार
धनबाद। अगर आप धनबाद नगर निगम के किसी भी अंचल कार्यालय Zone Office में जाकर जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र की फाइलों की स्थिति देखेंगे तो आपको डिजिटल इंडिया की दावों की हकीकत समझ आ जाएगी। यहाँ लापरवाही का आलम यह है कि एक-दो महीने नहीं बल्कि पूरे एक-एक साल के आवेदन पेंडिंग पड़े हैं। यह पेंडेंसी कोई तकनीकी खराबी नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का एक सुनियोजित हिस्सा है।
अंचलों की ग्राउंड रिपोर्ट जहाँ वक्त थम जाता है
नगर निगम के विभिन्न अंचलों चाहे वह झरिया हो कतरास सिंदरी या छाताटांड़ हर जगह की कहानी एक जैसी है। जाँच की जाए तो हजारों ऐसे आवेदन मिलेंगे जो साल भर से धूल फांक रहे हैं। नियमानुसार जो सर्टिफिकेट एक सप्ताह में आवेदक के हाथ में होना चाहिए था उसके लिए जनता अंचलों के चक्कर काट-काटकर चप्पलें घिस चुकी है।
जानकारों और पीड़ित जनता का सीधा आरोप है कि यह पेंडेंसी जानबूझकर पैदा की जाती है। जब तक काम पेंडिंग नहीं रहेगा तब तक आवेदक परेशान नहीं होगा और जब तक वह परेशान नहीं होगा तब तक बिचौलियों के माध्यम से 5000 रुपये का चढ़ावा कैसे आएगा साल भर से अटकी फाइलें इस बात का सबूत हैं कि यहाँ सिस्टम जनता की सेवा के लिए नहीं बल्कि उन्हें मजबूर करने के लिए चलाया जा रहा है।
झारखंड सरकार एक ओर सरकार आपके द्वार जैसे कार्यक्रम चलाकर जनता की समस्याओं के त्वरित निष्पादन का ढिंढोरा पीटती है वहीं दूसरी ओर धनबाद नगर निगम के अधिकारी सेवा का अधिकार अधिनियम’ RTPS को पैरों तले रौंद रहे हैं।

बच्चे परेशान जन्म प्रमाण पत्र न होने से नामांकन रद्द हो रहे हैं। बुजुर्ग और विधवाएं लाचार: मृत्यु प्रमाण पत्र के अभाव में पारिवारिक पेंशन और बैंक खातों का पैसा अटका हुआ है। क्या नगर आयुक्त महोदय ने कभी अंचलों का औचक निरीक्षण कर यह जानने की कोशिश की कि हजारों आवेदन साल भर से क्यों लंबित हैं। क्या झारखंड सरकार के पास इन अंचलों की कार्यप्रणाली की जाँच करने का समय है। पेंडिंग रखने वाले क्लर्कों और जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हु अब आर-पार की लड़ाई। धनबाद की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। यह रिपोर्ट प्रशासन को एक चेतावनी है कि या तो सात दिनों के भीतर एक पारदर्शी सिस्टम लागू किया जाए, या फिर साल भर की पेंडेंसी का हिसाब देने के लिए तैयार रहें। अगर सही से जाँच हुई, तो यह झारखंड का सबसे बड़ा ‘प्रमाण पत्र घोटाला’ साबित होगा।
रिपोर्ट: विशेष खोजी दल जोशी न्यूज़ मुजाहिद

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