सिंदरी FCIL आवासों पर गहराया संकट अधिकारी बोले राजनीतिक हस्तक्षेप ही एकमात्र रास्ता।

सिंदरी FCIL आवासों पर गहराया संकट अधिकारी बोले राजनीतिक हस्तक्षेप ही एकमात्र रास्ता।

धनबाद सिंदरी के भविष्य और हजारों निवासियों की छत को लेकर चल रही खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर है। जोशी न्यूज़ की पड़ताल में FCIL प्रबंधन और मंत्रालय का सख्त रुख सामने आया है।
प्रबंधन का बयान प्रशासनिक हाथ बंधे हैं
विधायक चंद्र देव महतो के साथ हुई वार्ता में FCIL के अधिकारी देवदास ने साफ लहजे में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आवासों को खाली कराने की प्रक्रिया को रोकना प्रशासनिक स्तर पर संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि। यह मुद्दा अब पूरी तरह पॉलिटिकल पावर के अधीन है।
यदि केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय से कोई राजनीतिक आदेश आता है, तभी इस कार्रवाई पर रोक लग सकती है।
उर्वरक मंत्रालय की दो-टूक निजी नहीं सरकारी है जमीन। उर्वरक मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए यह साफ कर दिया कि सिंदरी की जमीन किसी की निजी जागीर नहीं बल्कि पूर्णत सरकारी संपत्ति है। उन्होंने कहा
राजस्व में वृद्धि जमीन के अधिग्रहण का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार के राजस्व Tax को बढ़ाना है। औद्योगिक आवंटन इस भूमि को सेलकॉन Celkon और अन्य बड़ी औद्योगिक इकाइयों को आवंटित किया जा रहा है ताकि क्षेत्र का विकास हो सके। अधिग्रहण का तर्क मंत्रालय के अनुसार, निवासियों को पर्याप्त समय दिया गया, लेकिन अब सरकारी परियोजनाओं के विस्तार के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है।
जनता की उम्मीद और राजनीतिक दबाव
एक तरफ जहाँ सरकार इसे औद्योगिक उन्नति और टैक्स बढ़ोतरी से जोड़कर देख रही है, वहीं विधायक चंद्र देव महतो इसे स्थानीय लोगों के अस्तित्व की लड़ाई बता रहे हैं। अधिकारी के पॉलिटिकल पावर वाले बयान ने अब गेंद पूरी तरह से जनप्रतिनिधियों के पाले में डाल दी है।
जोशी न्यूज़ विशेष: क्या सिंदरी के विधायक और सांसद दिल्ली दरबार में इतना राजनीतिक दबाव बना पाएंगे कि हजारों बेघर होने वाले परिवारों को ‘स्थायी लीज’ का अधिकार मिल सके यह बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है।

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