मजिस्ट्रेट के सामने उड़ती रहीं नियमों की धज्जियां सिंदरी थाने में प्रतिबंधित डीजे और अग्नि खेल के साथ पहुंचा जुलूस प्रशासन लाचार

मजिस्ट्रेट के सामने उड़ती रहीं नियमों की धज्जियां सिंदरी थाने में प्रतिबंधित डीजे और अग्नि खेल के साथ पहुंचा जुलूस प्रशासन लाचार

 

सिंदरी बलियापुर जिला प्रशासन के कड़े दावों शांति समिति की बैठकों और प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाते हुए मोहर्रम के अखाड़ा जुलूस में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। इस बार के अखाड़ा जुलूस में एक विशेष तस्वीर यह भी देखने को मिली कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोग बड़ी संख्या में एक साथ अखाड़ा जुलूस में शामिल हुए। लेकिन इस कौमी एकता के बीच प्रशासनिक नाकामी भी पूरी तरह उजागर हो गई, जहां तैनात मजिस्ट्रेट मूकदर्शक बने देखते रह गए और नियमों का उल्लंघन होता रहा।

रंगा माटी जुलूस में उड़ीं नियमों की धज्जियां देखते रह गए मजिस्ट्रेट

बलियापुर थाना क्षेत्र के रंगा माटी से निकला अखाड़ा जुलूस तमाम सरकारी गाइडलाइंस को ताक पर रखकर आगे बढ़ा। इस जुलूस में न केवल प्रतिबंधित और तेज आवाज वाला बड़ा डीजे गरज रहा था, बल्कि सरेआम जानलेवा अग्नि का खेल आग के हैरतअंगेज स्टंट भी खेला गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि मौके पर सुरक्षा और नियम पालन की जिम्मेदारी संभाले तैनात मजिस्ट्रेट यह सब अपनी आंखों के सामने देखते रह गए, लेकिन वे कानून का उल्लंघन करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं कर पाए। प्रशासन की इसी लाचारी का फायदा उठाते हुए प्रतिबंधित बड़ा डीजे और अग्नि खेल दिखाते हुए जुलूस सीधे सिंदरी थाना परिसर के भीतर तक घुस गया और वहां ताजिया उड़ाया गया।

डोमगढ़ और गौशाला अखाड़ा समितियों ने पेश की अनुकरणीय मिसाल

एक तरफ जहां रंगा माटी के जुलूस में प्रशासनिक दावों की पोल खुली वहीं दूसरी तरफ डोमगढ़ और गौशाला बाजार के जुलूसों ने अनुशासन और शांति की बेहतरीन मिसाल पेश की

डोमगढ़ का जुलूस डोमगढ़ से निकला अखाड़ा जुलूस बेहद सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण ढंग से सिंदरी थाना पहुंचा। इस जुलूस में किसी भी प्रकार का बड़ा डीजे शामिल नहीं था और न ही कोई प्रतिबंधित अग्नि का खेल खेला गया।

गौशाला बाजार का जुलूस गौशाला बाजार चूड़ी पट्टी से निकला अखाड़ा जुलूस भी पूरी तरह अनुशासित रहा। गौशाला ओपी क्षेत्र के इस जुलूस में केवल परंपरा के अनुसार छोटा बाजा बजाया गया और बेहद शांत माहौल में सिंदरी थाना में इसका समापन हुआ।

केवल मीडिया के लिए हैं जिला प्रशासन के कड़े आदेश

इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आला अधिकारी केवल मीडिया के सामने और फाइलों में प्रतिबंधों के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर थाना क्षेत्र में डीजे का खेल धड़ल्ले से चालू है। तैनात मजिस्ट्रेट के सामने नियमों का टूटना और थाने के भीतर तक प्रतिबंधित डीजे का बेधड़क प्रवेश यह साबित करने के लिए काफी है कि प्रशासन का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है और उसकी तैयारी केवल कागजी थी।

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