तामझाम के बीच उठते सवाल: पुलिस की चमक-धमक और लचर व्यवस्था पर जनता का फूटा गुस्सा, न्याय प्रणाली पर भी उठे सवाल

तामझाम के बीच उठते सवाल: पुलिस की चमक-धमक और लचर व्यवस्था पर जनता का फूटा गुस्सा, न्याय प्रणाली पर भी उठे सवाल
​धनबाद। एक तरफ जहां धनबाद पुलिस अपनी प्रशासनिक छवि सुधारने के लिए आयोजनों और बुनियादी ढांचों के विस्तार में लगी है, वहीं दूसरी तरफ जिले में बेकाबू होता अपराध पुलिस और कानून-व्यवस्था के तमाम दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हाल ही में धनबाद पुलिस केंद्र के नवनिर्मित मुख्य द्वार का उद्घाटन बोकारो प्रक्षेत्र के आईजी शैलेन्द्र कुमार सिन्हा द्वारा उपायुक्त आदित्य रंजन, एसएसपी प्रभात कुमार और ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब की मौजूदगी में किया गया। बीस फीट ऊंचे और सैंतीस फीट चौड़े इस आकर्षक द्वार को पुलिस अपनी नई पहचान बता रही है, लेकिन आम जनता के लिए यह चकाचौंध बेमानी साबित हो रही है।
​खौफ के साये में व्यापारी, बुलंद हैं माफियाओं के हौसले
जिले में कोयला माफिया, बालू माफिया, लॉटरी गिरोह और रंगबाज़ों की गुंडागर्दी इस कदर हावी है कि आम व्यापारी हर दिन डर के साये में जीने को मजबूर है। रोजाना मिल रही धमकियों और रंगदारी की मांग ने व्यापारिक गतिविधियों पर ब्रेक लगा दिया है। स्थिति यह है कि सुबह घर से निकला व्यक्ति शाम को सुरक्षित वापस लौटेगा या नहीं, इसका कोई भरोसा नहीं बचा है।
​जनता का आक्रोश: ‘कागजी कार्रवाई बंद हो, अपराधियों का हो सीधा एनकाउंटर’
बढ़ते अपराध से आक्रोशित आम नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि सिर्फ नए भवनों, भव्य गेटों या सरकारी गाड़ियों से पुलिस की साख नहीं बनती। जनता का मानना है कि अपराध पर लगाम न लग पाने का एक बड़ा कारण ढुलमुल कानूनी प्रक्रिया और अदालती कार्यप्रणाली भी है, जिसके चलते बेखौफ अपराधी कानून के लूपहोल्स का फायदा उठाकर आसानी से बच निकलते हैं।
​जनता की मांग है कि न्यायपालिका और प्रशासन को कड़ा रुख अपनाते हुए आदतन और खूंखार अपराधियों के खिलाफ सीधी व कठोरतम कार्रवाई—यहाँ तक कि सीधे एनकाउंटर जैसे सख्त कदम उठाने का कड़ा संदेश देना चाहिए। जब तक अपराधियों के मन में कानून और पुलिस का खौफ पैदा नहीं होगा, तब तक किसी भी तरह का सौंदर्यीकरण धनबाद को सुरक्षा का एहसास नहीं करा सकता।

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