कमीशनखोरी की नींव पर विकास: वार्ड 53, 54 और 55 में घटिया निर्माण पर फूटा भांडा, ठेकेदार बोले 70 प्रतिशत कट ऊपर बंट जाता है

कमीशनखोरी की नींव पर विकास: वार्ड 53, 54 और 55 में घटिया निर्माण पर फूटा भांडा, ठेकेदार बोले 70 प्रतिशत कट ऊपर बंट जाता है
​धनबाद
​धनबाद नगर निगम क्षेत्र में विकास योजनाओं के नाम पर जारी लूट और भ्रष्टाचार की एक के बाद एक परतें खुलने लगी हैं। वार्ड नंबर 53, 54 और 55 में नाली व सड़क निर्माण में हो रही व्यापक धांधली ने अब एक नया और सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। एक तरफ जहां घटिया निर्माण से आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरने को तैयार है, वहीं दूसरी तरफ इस पूरे सिस्टम की अंदरुनी गंदगी और कमीशनखोरी का बड़ा सच सामने आया है।
​रोहड़ाबांध में ताश के पत्तों की तरह ढही नाली, अधिकारियों की केवल खानापूर्ति
​निर्माण की घटिया गुणवत्ता का सबसे प्रत्यक्ष और ताजा प्रमाण वार्ड नंबर 54 स्थित रोहड़ाबांध में देखने को मिल रहा है। यहाँ निर्माणाधीन नाली बनते ही जगह-जगह से ढह चुकी है। स्थानीय लोगों के भारी विरोध के बाद संबंधित विभागीय अधिकारी मौके पर पहुँचकर महज खानापूर्ति करते हैं। कार्रवाई के नाम पर दीवार का एक छोटा सा हिस्सा तुड़वा दिया जाता है और फिर वही पुराना ढर्रा चालू हो जाता है।
​ठेकेदार का झलका दर्द: 100 रुपये के काम में धरातल पर लगते हैं सिर्फ 30 रुपये
​घटिया निर्माण पर उठते सवालों के बीच ठेकेदारों के पक्ष से एक ऐसा सच सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। ठेकेदारों का दबी ज़ुबान में साफ कहना है कि निर्माण की दुर्दशा के लिए केवल वे अकेले जिम्मेदार नहीं हैं।
​ठेकेदारों के दावों के अनुसार, नगर आयुक्त से लेकर निचले स्तर के विभागीय अधिकारियों, स्थानीय नेता-मंत्रियों और यहाँ तक कि प्रेस तक को हर महीने तय मंथली और कमीशन पहुँचाना पड़ता है। किसी भी योजना का 70 प्रतिशत हिस्सा ऊपर से नीचे तक बांटने में ही चला जाता है। ऐसे में 100 रुपये के बजट वाले काम को महज 30 रुपये में पूरा करना पड़ता है। अब 30 रुपये की लागत में 100 रुपये वाली मजबूती कैसे आए, यह बड़ा सवाल है।
​कुंभकर्णी नींद में सोए उच्च अधिकारी: उच्चस्तरीय जांच के बाद ही खुलेगा सच
​तीन-तीन वार्डों में जनता के टैक्स के पैसे की इस तरह बंदरबांट हो रही है, लेकिन धनबाद के उपायुक्त और नगर आयुक्त का मौन बने रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
​क्या प्रशासनिक आलाधिकारियों को इस 70 प्रतिशत के कट मनी खेल की खबर नहीं है, या फिर पूरे सिस्टम की जड़ें ही इस कमीशनखोरी में धंसी हुई हैं? ठेकेदार के इस चौंकाने वाले दावे और जमीनी स्तर पर टूटी नालियों के दावों में कितनी सच्चाई है, यह तो किसी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। लेकिन फिलहाल, घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के इस गठजोड़ से त्रस्त जनता अब उग्र आंदोलन के मूड में है।

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