कलयुग में मोक्ष का सहज साधन है श्रीमद्भागवत कथा: पूज्य पंडित गौरंगी गौरी जी

कलयुग में मोक्ष का सहज साधन है श्रीमद्भागवत कथा: पूज्य पंडित गौरंगी गौरी जी

सिंदरी में गूंज रही कथा की अमृतरस धारा, शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु

धनबाद ,सिंदरी

कलयुग के घनघोर पापों और संतापों से मुक्ति पाने तथा आत्मा का परमात्मा से मिलन कराने का सबसे सरल और प्रामाणिक साधन श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण है। श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीव को भवसागर से पार उतारने वाली मोक्षदायिनी नौका है। कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जन्मांतरों के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसकी भटकती आत्मा को परम शांति मिलती है। यह कथा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का कार्य करती है। जो प्राणी सच्चे भाव से भागवत कथा में गोता लगाता है, उसे न केवल इस लोक में जीवन के समस्त कष्टों, व्याधियों और क्लेशों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मृत्यु के पश्चात आत्मा को मोक्ष और परमधाम की प्राप्ति होती है।

जिला धनबाद के सिंदरी में चल रहे भव्य श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन अयोध्या धाम से पधारीं अंतरराष्ट्रीय कथा प्रवक्ता परम पूज्य पंडित गौरंगी गौरी जी ने शिव पार्वती विवाह प्रसंग सुनाते हुए यह विचार व्यक्त किए। कथा के दौरान पूज्य देवी जी ने बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह बहुत ही दिव्य रहा। माता पार्वती की कठिन तपस्या के परिणाम स्वरूप ही भगवान शिव ने उन्हें अपनी शक्ति के रूप में चयन किया।

शिव पार्वती के विवाह की कथा का श्रवण कराते हुए उन्होंने कहा कि नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत पिशाचों के साथ बारात लेकर राजा हिमाचल के यहां पहुंचे तो माता पार्वती के माता पिता बारात में सम्मिलित भूत प्रेत और आव्हाड को देखकर अचंभित रह गए। लेकिन माता पार्वती ने खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार किया। पूज्य देवी जी ने बताया कि भगवान शिव एवं पार्वती की शादी में सभी देवी देवता और असुर भी पहुंचे। जानवर, कीड़े मकोड़े और सारे जीव उनके विवाह में उपस्थित हुए। यहां तक कि भूत पिशाच और प्रेत भी उनके विवाह में बाराती बनकर खूब आनंद लिए। भगवान शिव को देवों का देव महादेव बताया जाता है और जब शिव की पूजा की जाती है तो जीवन में सुख की अनुभूति होती है, सारे क्लेश मिट जाते हैं और लोगों का आपसी झगड़ा समाप्त हो जाता है।

वही कथा के मुख्य यजमान श्रीकांत सिंह जी एवं अपने परिवार के साथ कथा श्रवण कर रही गीता देवी और उनका पूरा परिवार बहुत ही आनंदित हुआ। पूरा पंडाल एकदम भक्तों से भरा रहा और पूज्य देवी जी द्वारा गाई जा रही कथा में श्रोताओं ने भक्ति की डुबकी लगाई।

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