सिंदरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली पर फूटा गुस्सा, विधायक के प्रयास और पीएमओ पोर्टल की शिकायत भी बेअसर, जनता के टैक्स की लूट का आरोप

सिंदरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली पर फूटा गुस्सा, विधायक के प्रयास और पीएमओ पोर्टल की शिकायत भी बेअसर, जनता के टैक्स की लूट का आरोप
धनबाद के उपायुक्त द्वारा हाल ही में सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण कर विकास कार्यों का जायजा लिया गया, लेकिन दूसरी ओर सिंदरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौशाला बाजार की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है और अस्पताल पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब से डॉक्टर मिहिर को प्रभारी पद से हटाया गया है, तब से अस्पताल में दवाओं की भयंकर किल्लत हो गई है। स्थिति इतनी दयनीय है कि दूर-दराज से इलाज कराने आने वाले बूढ़े और बुजुर्ग मरीजों को ब्लड प्रेशर, शुगर, पैरासिटामोल, बच्चों के लिए सिरप और दर्द का मलहम जैसी सामान्य और बुनियादी दवाएं तक नसीब नहीं हो पा रही हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियों द्वारा अस्पताल को लगातार डोनेशन और फंड दिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद मरीजों को दवाइयां न मिलना गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जनता का सवाल है कि कंपनियों से मिलने वाला डोनेशन का पैसा आखिर किन-किन भ्रष्ट अधिकारियों की जेब में जा रहा है, जिसका जवाब धनबाद के उपायुक्त को देना चाहिए।
इस गंभीर मामले को लेकर स्थानीय विधायक चंद्रदेव महतो ने भी कड़ा रुख अपनाया है। विधायक ने इस मुद्दे को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया है और अस्पताल की बदहाली को लेकर कई बार डीसी से सीधी बातचीत भी की है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इस पर पूरी तरह अनदेखी बरती जा रही है, जिससे अस्पताल की स्थिति सुधरने के बजाय दिन-प्रतिदिन और अधिक बिगड़ती जा रही है।
मीडिया संचालक नरेंद्र जोशी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए बताया कि अस्पताल की बदहाली को लेकर अनगिनत बार लिखित शिकायतें पीएमओ (PMO) पोर्टल तक दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन आज तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही व्यवस्था में कोई सुधार देखने को मिला है। लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद कुंभकरण की नींद सो रहे जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे, इसका किसी को पता नहीं है।
नरेंद्र जोशी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों ने जल्द से जल्द इस व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया, तो जनता और स्थानीय लोग सभी कानूनी और लोकतांत्रिक गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करते हुए सड़क जाम करने और अस्पताल में तालाबंदी करने जैसे उग्र कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे। जब अस्पताल में मरीजों को देने के लिए सही दवाएं ही मौजूद नहीं हैं, तो ऐसे फर्जी तरीके से अस्पताल को खुला रखने का क्या औचित्य है? बिना इलाज के केवल औपचारिकता निभाई जा रही है जबकि दूसरी तरफ डॉक्टर और अन्य स्टाफ का वेतन सरकारी खजाने से यानी जनता के खून-पसीने की कमाई और टैक्स के पैसों से दिया जा रहा है, जो जनता के साथ एक खुला और भारी घोटाला है।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now

जवाब जरूर दे 

[poll]

Related Articles

Back to top button
Close
Website Design By Mytesta.com +91 8809666000