श्रीमद्भागवत कथा से मिटते हैं सभी पाप डोमगढ़ में कथावाचिका गौरंगी गौरी बोलीं शिव पार्वती विवाह में भूत प्रेत भले गए हों पर इस कलयुग में हम इंसान कथा सुनकर हो रहे पापमुक्त

सिंदरी और डोमगढ़ धनबाद 29 अक्टूबर 2026 धनबाद जिले के सिंदरी क्षेत्र अंतर्गत डोमगढ़ में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान महायज्ञ के तीसरे दिन संपूर्ण क्षेत्र पूरी तरह भक्ति और अध्यात्म के रंग में सराबोर नजर आया तीसरे दिन के अनुष्ठान की शुरुआत तड़के स्नान ध्यान एवं मंडप प्रवेश के साथ हुई तत्पश्चात आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आवाह्न किए गए देवी देवताओं का पूरी श्रद्धा और विधि विधान से पूजन संपन्न कराया गया
यज्ञ के इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान श्रीमती गीता देवी एवं उनके सुपुत्र सपत्नीक शशिकांत सिंह श्रीकांत सिंह तथा अक्रूरकांत सिंह ने यजमानवेदी पर बैठकर सर्व कल्याण की भावना के साथ भगवान की पूजा अर्चना की और आरती उतारी
कथा के तीसरे दिन घनश्याम ग्रोवर रामदेव पांडेय एवं भारतीय जनता पार्टी की तारा देवी पूर्व विधायक की पत्नी ने कथा में सम्मिलित होकर कथा श्रवण किया और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला
आज के कार्यक्रम का विशेष आकर्षण भगवान शिव की मिट्टी से निर्मित पार्थिव मूर्ति शिवलिंग की स्थापना और उसका भव्य अभिषेक रहा धार्मिक मान्यतानुसार पार्थिव पूजन से साधक की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं यह अनुष्ठान काशी वाराणसी से पधारे प्रख्यात आचार्यों एवं विद्वान वैदिक ब्राह्मणों के सानिध्य में संपन्न हुआ अभिषेक कराने वाले आचार्यों में मुख्य रूप से पं मुकेश पुरोहित दीपक दुबे डॉ महेशा तिवारी धनंजय पांडेय अनिल पांडेय एवं चंदन पांडेय शामिल थे वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ से पूरा यज्ञ स्थल गुंजायमान हो उठा
पूजन एवं अभिषेक के पश्चात दोपहर और संध्या सत्र में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया कथावाचिका गौरंगी गौरी जी ने अपने मधुर व ओजस्वी वचनों से भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का अत्यंत मनमोहक प्रसंग सुनाया
कथावाचिका गौरंगी गौरी जी ने शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए बहुत ही सुंदर आध्यात्मिक दृष्टांत दिया उन्होंने कहा कि पौराणिक मान्यताओं और शिव पुराण के अनुसार जब भगवान शिव की बारात निकली थी तो उसमें देवी देवताओं के साथ साथ भूत प्रेत पिशाच गण और अघोरी भी शामिल हुए थे क्योंकि महादेव अचर चर संपूर्ण सृष्टि के स्वामी हैं और वे सब पर कृपा करते हैं उन्होंने आगे कहा कि उस पौराणिक काल में शिव विवाह में भले ही भूत प्रेत और जीव जंतु बाराती बनकर गए हों लेकिन इस कलयुग में हम सौभाग्यशाली इंसान स्वयं भगवान की कथा और उनके पावन विवाह उत्सव में शामिल हो रहे हैं
कथावाचिका ने विशेष रूप से यह भी फरमाया कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से मनुष्य जन्म जन्मांतर के संचित हर पापों से मुक्त हो जाता है भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन जीव और ब्रह्म के मिलन का प्रतीक है जो हमें त्याग तपस्या और प्रेम का सच्चा संदेश देता है इस दिव्य प्रसंग के दौरान पूरा पंडाल शिव पार्वती विवाह की जय के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्तिरस में झूमते नजर आए
अनुष्ठान के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम देखे गए कथा के उपरांत महाआरती संपन्न हुई और उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया स्थानीय आयोजकों और ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में धार्मिक चेतना और आपसी सौहार्द का विस्तार होता है

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