जोशी न्यूज 24 और सोशल मीडिया पर खबर वायरल: बीआईटी सिंदरी बाउंड्री निर्माण में महाघोटाला, आज भी नहीं सुधरे हालात, जीपीएस फोटो ने खोली पोल

जोशी न्यूज 24 और सोशल मीडिया पर खबर वायरल: बीआईटी सिंदरी बाउंड्री निर्माण में महाघोटाला, आज भी नहीं सुधरे हालात, जीपीएस फोटो ने खोली पोल

​ठेकेदार, बीआईटी डायरेक्टर और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की तिगड़ी से घटिया निर्माण का खेल जारी

​सिंदरी और धनबाद। झारखंड के एकमात्र प्रतिष्ठित सरकारी तकनीकी संस्थान, बीआईटी सिंदरी में चल रहे कैंपस बाउंड्री निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और धांधली अपनी सारी सीमाएं लांघ चुकी है। एक नवंबर दो हजार छब्बीस तक के ताजा जमीनी हालात यह गवाही दे रहे हैं कि जोशी न्यूज 24 और सोशल मीडिया पर खबर छपने और चारों तरफ से फजीहत होने के बाद भी निर्माण की गुणवत्ता में रत्ती भर का सुधार नहीं आया है।

​सामने से बराकर का बालू और पीछे नदी का घटिया बालू और जीपीएस फोटो ने खोली ढोंग की पोल। ताजा जीपीएस तस्वीरों और जमीनी निरीक्षण से ठेकेदार के नए पैंतरेबाज़ी का भंडाफोड़ हुआ है। निरीक्षण को धोखा देने के लिए आगे हाइवे की तरफ तो बराकर नदी का बढ़िया बालू गिराकर दिखाया गया है, लेकिन बाउंड्री के ठीक पीछे और अंदरूनी हिस्सों में नदी की घटिया, सिल्ट युक्त और मटमैली बालू का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।

​यह साफ तौर पर दर्शाती है कि यह केवल ठेकेदार की मनमानी नहीं है, बल्कि बीआईटी सिंदरी के डायरेक्टर, ठेकेदार और झारखंड सरकार के उच्च स्तरीय शिक्षा अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी फंड को चूना लगाया जा रहा है।

​पिछले घटनाक्रम की पूरी कड़ी बाईस अक्टूबर से अब तक का घटनाक्रम इस प्रकार है।

​बाईस अक्टूबर दो हजार छब्बीस यानी शुरुआती जमीनी रिपोर्टिंग के दौरान कार्यस्थल पर हुई पहली रिपोर्टिंग में साफ हुआ था कि बाउंड्री निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मानक के अनुसार सीमेंट और बालू के मिश्रण के बजाय घटिया मिट्टी और घटिया बालू मिलाकर नींव तथा दीवारों की ढलाई की जा रही थी।

​पत्रकार नरेंद्र जोशी की मुहिम और प्रधानमंत्री कार्यालय पोर्टल पर झूठी रिपोर्टिंग के तहत बीआईटी सिंदरी में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ पत्रकार नरेंद्र जोशी लगातार आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने इस धांधली की लिखित शिकायत झारखंड के मुख्य सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय पोर्टल पर दर्ज कराई थी। हैरानी की बात यह रही कि अधिकारियों ने जांच करने के बजाय पोर्टल पर झूठी और मनगढ़ंत रिपोर्ट अपलोड करके मामले में लीपापोती कर दी। इस फर्जी रिपोर्टिंग से आम जनता और केंद्र सरकार के पोर्टल दोनों को भ्रमित किया गया।

​सरकारी फंड की खुली लूट के तहत झारखंड सरकार बीआईटी सिंदरी के विकास के लिए जनता के टैक्स का भारी-भरकम फंड जारी करती है। लेकिन डायरेक्टर और अधिकारियों की शह पर ठेकेदार घटिया निर्माण सामग्री लगाकर लाखों-करोड़ों रुपए डकार रहे हैं।

​आज यानी एक नवंबर दो हजार छब्बीस का कड़ा सवाल यह है कि जवाबदेही किसकी है। क्या बीआईटी सिंदरी के डायरेक्टर बेखबर हैं। अगर नहीं, तो जीपीएस लोकेशन वाली तस्वीरों में घटिया बालू का इस्तेमाल दिखने के बावजूद काम तुरंत बंद क्यों नहीं कराया गया। शिक्षा विभाग के आला अफसर मौन क्यों हैं। क्या राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों को इस बंदरबांट में अपना हिस्सा मिल रहा है, जो वे फर्जी रिपोर्टिंग पर आंखें मूंदे बैठे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय पोर्टल को गुमराह करने वालों पर कार्रवाई कब होगी। सरकारी जांच पोर्टल पर झूठी रिपोर्ट डालना कानूनन अपराध है, फिर भी दोषी अधिकारियों पर प्राथमिकी क्यों नहीं हुई।

​प्रबुद्ध नागरिकों और छात्रों का फूटा गुस्सा। धनबाद के प्रबुद्ध नागरिकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बीआईटी सिंदरी के छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बाउंड्री निर्माण कार्य की तुरंत उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और दोषी ठेकेदार, बीआईटी डायरेक्टर व उच्च अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

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