कागजी फरमान या धरातल पर कड़ाई क्या कमीशन के खेल में हवा हो जाएंगे उपायुक्त के आदेश

कागजी फरमान या धरातल पर कड़ाई क्या कमीशन के खेल में हवा हो जाएंगे उपायुक्त के आदेश

धनबाद जिला प्रशासन ने पटाखों के अवैध भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए गोल्फ ग्राउंड, तेतुलतल्ला और लाताडीह बलियापुर जैसे स्थान चिह्नित कर एडीएम कार्यालय से ₹500 शुल्क के साथ अस्थायी लाइसेंस की व्यवस्था तो कर दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या धनबाद के सभी थाना क्षेत्र इस आदेश को ईमानदारी से लागू करवा पाएंगे
कोयलांचल की जनता बखूबी जानती है कि त्योहारों का सीजन आते ही हफ्ता वसूली और दो नंबर’ की कमाई का खेल किस तरह शुरू होता है। सिंदरी गौशाला बाजार सिंदरी कॉलेज मोड़, रोहराबांध, शहरपुरा, डोमगढ़, तसला मोड़, परघासडीह, बलियापुर, शीतलपुर, सबलपुर, गोलकडीह, तिसरा, लोदना, बनियाहीर, झरिया, चौथाई कुली, बस्ताकोला, धंसार, बैंक मोड़, श्रमिक चौक से लेकर धनबाद शहर तक और पूरे जिले में बिना किसी सुरक्षा मानक के बारूद के ढेर जमा कर दिए जाते हैं।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से धनबाद जिले के सिंदरी, गौशाला, कांड्रा, चासनाला, पाथरडीह, नुनुडीह, डिगाडीह, सुदामडीह, भौरा, भागा एवं बरारी सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पटाखों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रखी गई है, और स्थानीय प्रशासन को इन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतते हुए रोक सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही, बिक्री हेतु निर्धारित स्थलों पर अग्निशामक यंत्र एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। लेकिन कागजों पर विस्फोटक नियमावली, 2016 के बड़े-बड़े नियम छाप दिए जाने के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि थानों की सांठगांठ और हफ्ता सेटिंग के दम पर हर मोड़ पर बारूद बिकता है।
क्या स्थानीय पुलिस चिह्नित स्थलों के अलावा संकरी गलियों और इन संवेदनशील क्षेत्रों में चल रही अवैध दुकानों पर वाकई सीलिंग की कार्रवाई करेगी, या फिर त्योहार के नाम पर जेब गर्म करके आंखें मूंद ली जाएंगी घनी आबादी के बीच अगर कोई हादसा होता है, तो क्या इसकी जवाबदेही वसूली करने वाले थाना प्रभारियों और बीट पुलिस अधिकारियों की होगी नियमों का चाबुक अक्सर छोटे खुदरा विक्रेताओं पर चलता है, जबकि बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण करने वाले सिंडिकेट को पुलिस का संरक्षण मिलता रहा है।
अगर उपायुक्त आदित्य रंजन के सख्त निर्देशों के बावजूद धनबाद के हर थाना क्षेत्र और चप्पे-चप्पे पर अवैध पटाखों की बिक्री बेधड़क जारी रहती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि जिला प्रशासन का इकबाल खत्म हो चुका है और खाकी की जेबें गर्म करने का खेल जारी है। अब देखना यह है कि प्रशासन कागजी शेर बनने से बचता है या जमीनी स्तर पर कार्रवाई करके अपनी साख बचाता है।

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