झरिया अंचल में सरकारी आदेश हवा-हवाई 7 दिनों में आए मात्र 38 आवेदन लापरवाह कर्मचारियों पर गिरेगी गाज

झरिया अंचल में सरकारी आदेश हवा-हवाई 7 दिनों में आए मात्र 38 आवेदन लापरवाह कर्मचारियों पर गिरेगी गाज

झरिया धनबाद उपायुक्त और अपर समाहर्त्ता के निर्देशों को ठेंगे पर रखने वाले झरिया अंचल के कर्मचारियों की अब खैर नहीं है। बीसीसीएल BCCL की लोदना क्षेत्र स्थित एन.टी.एस.टी. परियोजना के प्रभावित रैयतों को न्याय दिलाने के लिए 11 मई से 17 मई तक विशेष कैंप लगाने का सरकारी प्रावधान था। लेकिन सात दिनों के इस अभियान में प्रशासन की कागजी मुस्तैदी और जमीनी सुस्ती का बड़ा खेल उजागर हुआ है।

मैदान से फौज गायब अकेले सिपाही ने संभाला मोर्चा

हैरानी की बात यह है कि पूरे झरिया अंचल में जहाँ भारी संख्या में राजस्व कर्मचारियों को तैनात होना था, वहां पूरे क्षेत्र में केवल हल्का 8 के कर्मचारी अभय कुमार सिन्हा ही भंवरा बीसीसीएल क्षेत्र में मुस्तैद दिखे। इन्हीं के पास अब तक कुल 38 आवेदन जमा हुए हैं। दूसरी तरफ, जनता और मीडिया का आरोप है कि चूड़ी घर, नूनूडीह और लोदना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कैंप लगा ही नहीं। रिपोर्टर मोहित जोशी और मुजाहिद के निरीक्षण में भी बाकी कर्मचारी फील्ड से नदारद पाए गए।

अंचल अधिकारी की कड़ी चेतावनी होगी सख्त कार्रवाई

इस पूरे मामले पर झरिया अंचल अधिकारी मनोज कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि

ऐसे कर्मचारी और अंचल निरीक्षक जो अपनी ड्यूटी से नदारद रहे, उन पर हमारी कड़ी नजर है। सरकार के आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अंचल निरीक्षक की लाचारी या लापरवाही

अंचल निरीक्षक राम रतन पांडे ने दूरभाष पर बताया कि 17 मई की दोपहर 3:00 बजे तक उनके पास कोई अधिकारिक रिपोर्ट नहीं पहुँची है। सवाल यह उठता है कि जब 11 मई से ही कैंप निर्धारित थे, तो सात दिनों बाद भी सूचनाओं का यह अभाव प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

क्या 38 आवेदनों के भरोसे हजारों रैयतों को मुआवजा मिल पाएगा क्या अंचल अधिकारी की यह चेतावनी केवल कागजी साबित होगी या सचमुच उन कर्मचारियों पर गाज गिरेगी जिन्होंने मुकुंदा-सुरूंगा जैसे संवेदनशील विवाद पर सरकार को अंधेरे में रखा

जोशी न्यूज़ रिपोर्टर मुजाहिद की खास रिपोर्ट

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