धनबाद से रांची तक न्याय का मंदिर चुप क्यों सुदामडीह में पुलिस-सफेदपोशों के सिंडिकेट के आगे बेअसर हुए हाईकोर्ट के पुराने तेवर

धनबाद से रांची तक न्याय का मंदिर चुप क्यों सुदामडीह में पुलिस-सफेदपोशों के सिंडिकेट के आगे बेअसर हुए हाईकोर्ट के पुराने तेवर

सच्चाई से मुंह मोड़ता प्रशासन सुदामडीह में खाकी के संरक्षण में लुट रही देश की संपदा आखिर न्यायपालिका भी क्यों है मौन

धनबाद सुदामडीह
कहते हैं कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो कानून की किताबें सिर्फ दफ्तरों की शोभा बढ़ाने के काम आती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों धनबाद जिले के सुदामडीह थाना क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ राज्य सरकार और जिला प्रशासन अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुदामडीह क्षेत्र से हर रात और दिन के उजाले में अवैध कोयले से लदे ट्रकों का बेखौफ गुजरना प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा रहा है।
रोजाना गुजरती हैं 4 से 5 गाड़ियाँ, आखिर किसकी शह पर
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो सुदामडीह थाना क्षेत्र से रोजाना नियम-कानून को ताक पर रखकर 4 से 5 अवैध कोयला लदे भारी वाहन 18 चक्के और बड़े ट्रक धड़ल्ले से पार हो रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इन भारी वाहनों की आवाजाही इतनी अदृश्य है कि स्थानीय पुलिस को दिखाई नहीं देती या फिर सच वही है जो इस इलाके का बच्चा-बच्चा जानता है कि यह सब कुछ तय नजराने और सिंडिकेट के खेल का हिस्सा है।
हमारा कोई क्या बिगाड़ लेगा खाकी का बढ़ता अहंकार
इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जब इस अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाई जाती है या समाचार प्रकाशित किए जाते हैं, तो जिम्मेदारों की तरफ से बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अहंकारी दलीलें सामने आती हैं। सूत्रों के अनुसार व्यवस्था के कर्णधारों का यहां तक कहना है कि कितने भी समाचार प्रकाशित कर लो हमारा कुछ नहीं बिगड़ने वाला क्योंकि ऊपर तक सब मिलीभगत है। जितना भी ईमानदारी का चोला पहन लो, कोई फायदा नहीं है।
यह बयान न केवल लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता का अपमान है, बल्कि धनबाद के उपायुक्त DC वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक SSP और सीधे झारखंड सरकार की साख पर भी एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या सुदामडीह में बैठे अधिकारियों का हौसला इतना बढ़ गया है कि उन्हें अब सूबे के मुखिया या जिले के कप्तानों का कोई खौफ नहीं रहा
जब रक्षक और व्यवस्था सोए, तो न्याय का मंदिर भी चुप क्यों
इस पूरे परिदृश्य में सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल देश की न्यायपालिका पर उठता है। पूर्व में धनबाद न्यायालय और रांची हाईकोर्ट ने इस क्षेत्र में कोयले के अवैध कारोबार और सिंडिकेट पर कड़ा रुख अपनाया था। कई बार स्वत संज्ञान Suo Motu और जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी और एक्शन लिया था।
मगर आज सवाल उठता है कि आखिर अब न्यायालय भी चुप क्यों साधे हुए है जब जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र पूरी तरह से इस अवैध खेल में लिप्त या मौन नजर आ रहे हैं, तब न्याय के इस सर्वोच्च मंदिर की चुप्पी समझ से परे है। क्या न्यायालय के आदेशों की अवहेलना इतनी आम हो गई है कि अब सुदामडीह की सड़कों पर दौड़ते अवैध ट्रक कोर्ट की नाक के नीचे से बेखौफ गुजर रहे हैं आखिर क्यों धनबाद कोर्ट और रांची हाईकोर्ट इस गंभीर और राजस्व लूटने वाले मामले पर दोबारा सख्त रुख नहीं अपना रहे
जनता का टैक्स, सफेदपोशों की जेब और पुलिस की मौज
यह लूट सिर्फ कोयले की नहीं, बल्कि इस देश की गरीब जनता के हक और उनके टैक्स के पैसे की है। एक तरफ स्थानीय जनता धूल, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ जनता की इस खनन संपदा को लूटकर कुछ सफेदपोश नेता और पुलिस प्रशासन के कथित भ्रष्ट अधिकारी अपने घरों की तिजोरियां भर रहे हैं। ईमानदारी को बेवकूफी समझने वाली यह मानसिकता समाज को विनाश की ओर ले जा रही है।
बड़े सवाल जिनका जवाब प्रशासन और व्यवस्था को देना होगा
जिम्मेदार कौन सुदामडीह थाना क्षेत्र की नाक के नीचे से रोजाना गुजरने वाले अवैध ट्रकों की जवाबदेही किसकी है स्थानीय थाना प्रभारी की या जिला स्तर के आला अधिकारियों की
कार्रवाई से परहेज क्यों जब मामले इतने स्पष्ट हैं, तो झारखंड सरकार और धनबाद के उपायुक्त इस सिंडिकेट पर कानूनी हंटर चलाने से क्यों कतरा रहे हैं
न्यायालय कब जागेगा क्या रांची हाईकोर्ट और धनबाद कोर्ट इस क्षेत्र में हो रही खुली लूट और स्थानीय अधिकारियों के बढ़े हुए हौसलों पर दोबारा संज्ञान लेकर कोई ऐतिहासिक आदेश जारी करेंगे
ब्यूरो रिपोर्ट, जोशी न्यूज।

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