रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाई ये कोई आम इंसान नहीं, ये अमृत्व को जीते हुए एक शिक्षक हैं!

रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्चाई ये कोई आम इंसान नहीं, ये अमृत्व को जीते हुए एक शिक्षक हैं!
इस तस्वीर को ज़रा ध्यान से देखिए आँखों में आँसू और दिल में सम्मान न आ जाए तो कहिएगा।
आज सुबह चतरा जिले के मध्य विद्यालय कसियाडीह के प्रभारी प्रधानाध्यापक बिजेंद्र दयाल जी विद्यालय जाने के क्रम में एक भयानक हाइवा दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसा इतना दर्दनाक था कि उनका बायां हाथ पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया जिसे बाद में डॉक्टरों को काटना पड़ा
लेकिन इस मंजर के बाद जो हुआ, वह इंसानियत के इतिहास में दर्ज होने वाली मिसाल है! जब एक आम इंसान दर्द से चीख रहा होता है, तब इस कर्मवीर शिक्षक के चेहरे पर एक शिकन तक नहीं थी। उन्होंने खून से सने हाथों से मोबाइल निकाला और तीन फोन किए
पहला फोन सहयोगी शिक्षक को मेरी एक छोटी सी सड़क दुर्घटना हो गई है, आप आज विद्यालय संचालित कीजिएगा। बच्चों की पढ़ाई और मध्याह्न भोजन MDM बाधित नहीं होना चाहिए।
दूसरा फोन परिवार को चिंता की कोई बात नहीं है एक छोटी सी दुर्घटना हुई है, सब ठीक हो जाएगा, डरना मत।
तीसरा फोन एम्बुलेंस को। जरा सोचिए! जिस इंसान का हाथ शरीर से अलग होने की कगार पर है, उसे अस्पताल से पहले अपने स्कूल के बच्चों की पढ़ाई और उनके दोपहर के खाने (मध्याह्न भोजन) की चिंता है! कड़वी सच्चाई
8:45 बजे की बायोमेट्रिक उपस्थिति Online Attendance की इस अंधी आपाधापी में हर दिन न जाने कितने शिक्षक सड़कों पर मौत और हादसों से जूझ रहे हैं। तंत्र भले ही उनके साथ मशीन जैसा सुलूक करे, लेकिन एक शिक्षक का दिल हमेशा अपने बच्चों के लिए ही धड़कता है।
सदर अस्पताल चतरा में प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें पटना रेफर किया गया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे जल्द स्वस्थ हों। ऐसे कर्तव्यनिष्ठ, कर्मवीर और रियल लाइफ हीरो को पूरा देश सादर प्रणाम करता है

 

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